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8 दिस॰ 2019

जौ के फायदे और नुकसान

Advantages and disadvantages of barley -
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जौ एक विशेष खाद्य आहार है जिसका उपयोग भारत में प्राचीन समय से किया जा रहा है। जौ के फायदे आपको कई स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं से बचा सकते हैं। जौ का उपयोग विशेष रूप से जौ की रोटी के रूप में किया जाता है। हालांकि जौ के औषधीय गुणों के कारण आप इसे कई व्‍यंजनों के रूप में उपयोग कर सकते हैं। जौ खाने के फायदे उच्‍च रक्‍तचाप, गठिया, अस्‍थमा, नपुंसकता, त्‍वचा समस्‍याओं और हृदय रोगों को दूर करने के लिए कर सकते हैं। आज इस लेख में आप जौ खाने के फायदे और नुकसान संबंधी जानकारी प्राप्‍त करेगें।

बारले (जौ) क्‍या है – 
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जौ एक प्रमुख खाद्य अनाज है जो घास परिवार (grass family) से संबंधित है। जौ का वैज्ञानिक नाम होर्डियम बल्‍गारे (Hordium vulgar) है जो कि समशीतोष्‍ण जलवायु में अच्‍छी तरह से विकास करता है। जौ का उपयोग विशेष रूप से जानवरों के चारे के रूप में किया जाता था। लेकिन अपने औषधीय गुणों और स्‍वास्‍थ्‍य लाभों के कारण इसे खाद्य आहार के रूप में इस्‍तेमाल किया जाने लगा। हालांकि जौ का उपयोग बीयर और कुछ आसुत पेय पदार्थों के लिए भी किया जाता है।

जौ की तासीर क्‍या होती है – 
जौ की तासीर ठंडी होती है जिसके कारण यह पेट संबंधी समस्‍याओं को प्रभावी रूप से दूर कर सकती है। जौ की ठंडी तासीर होने के अलावा इसमें बहुत से पोषक तत्‍व और खनिज पदार्थों की अच्‍छी मात्रा होती है। जिसके कारण यह हमारी बहुत सी स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं को प्रभावी रूप से दूर कर सकता है।

जौ के प्रकार – 
उपयोग के आधार पर जौ के कई प्रकार होते हैं जिन्‍हें आप बाजार से खरीद सकते हैं। जौ को आमतौर पर जौ के बीज या जौ के पानी के रूप में सेवन किया जाता है। हालांकि जौ के अलग-अलग प्रकार अलग-अलग उपयोग के लिए होते हैं। इसलिए यह आपको तय करना है कि जौ का कौन सा प्रकार आपके लिए अधिक उपयोगी है।
जौ घास (Barley Grass) – ये जौ के पौधे के युवा अंकुर होते हैं। इनकी ऊंचाई केवल कुछ ही इंच होती है जब ये उपयोग करने के लिए अच्‍छे होते हैं। जौ के इस रूप में एंटीऑक्‍सीडेंट, विटामिन, खनिज और प्रोटीन की अच्‍छी मात्रा होती है।

हुल्‍ड बारले (Hulled Barley) – जौ के इस प्रकार में केवल पौधे आधारित भूसी को साफ किया जाता है। जबकि जौ के ऊपरी आवरण को साफ कर पूरे चोकर को बरकरार रखते हुए बनाया जाता है। यह जौ की अन्‍य किस्‍मों की तुलना में अधिक फाइबर और पौष्टिकता से भरपूर होता है।

पर्ल जौ (Pearl Barley) – जौ का यह प्रकार बाजार में सबसे अधिक मात्रा में उपलब्‍ध होता है। इस प्रकार का जौ सफेद रंग के होते हैं, इनके दाने एक समान अकार के होते हैं जो छोटे मोती के समान दिखाई देते हैं। इस प्रकार के जौ से चोकर को साफ करके बनाया जाता है। पर्ल बारले मुख्‍य रूप से सूप और सलाद आदि में उपयोग किया जाता है।

ग्रीन जौ पाउडर (Barley Green Powder) – जौ का यह प्रकार जौ की हरी घास का पाउडर होता है। जिसके कई चिकित्‍सीय लाभ होते हैं। इसे व्‍हीटग्रास पाउडर की तरह ही बनाया जाता है। इस पाउडर में विभिन्‍न विटामिन, और खनिज पदार्थों की अच्‍छी मात्रा होती है। यह पानी में आसानी से घुलनशील होता है।

जौ का आटा (Barley Flour) – यह जौ को बीजों को पीसकर तैयार किया जाता है। बहुत से लोग इसे गेहूं के आटे के विकल्‍प के रूप में उपयोग करते हैं। जौ का आटा मौती जौ की तुलना में अधिक पोषक तत्‍वों और फाइबर का अच्‍छा स्रोत होता है।

जौ का पानी (Barley water) – यह जौ के बीजों को रात भर पानी में भिगोकर या कुछ मिनिट के लिए पानी में उबाल कर तैयार किया जाता है। जौ के पानी में विशेष औषधीय गुण होते हैं जो किड़नी और मूत्राशय संबंधित समस्‍याओं को दूर करने में मदद करते हैं।
आइए जाने जौ में पाए जाने वाले पोषक तत्‍व क्‍या हैं।

जौ के पोषक तत्‍व –
जौ आपके आहार के लिए स्‍वादिष्‍ट और पौष्टिक विकल्‍प होता है। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि जौ में पोषक तत्‍वों की उच्‍च मात्रा होती है। जौ में पाए जाने वाले पोषक तत्‍वों में कार्बोहाइड्रेट, घुलनशील और अघुलनशील फाइबर, सोडियम, विटामिन, खनिज पदार्थ, अमीनो एसिड और फैटी एसिड आदि शामिल होते हैं। जौ कोलेस्‍ट्रॉल से मुक्‍त खाद्य पदार्थों की श्रेणी में आता है। खनिज पदार्थों की बात की जाये तो जौ में सेलेनियम, आयरन, मैंगनीशियम, जिंक, फॉस्‍फोरस और तांबा की अच्‍छी मात्रा होती है। इन पोषक तत्‍वों की उच्‍च मात्रा मौजूद होने के कारण ही जौ के स्‍वास्‍थ्‍य लाभ होते हैं। आइए जाने जौ के स्‍वास्‍थ्‍य लाभ क्‍या हैं।

जौ खाने के फायदे – 
स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी समस्‍याओं को दूर करने के लिए जौ का औषधीय उपयोग किया जाता है। जौ के लाभ न केवल स्‍वास्‍थ्‍य बल्कि सौंदर्य के लिए भी जाने जाते है। आप अपनी बालों संबंधी समस्‍याओं को दूर करने के लिए भी जौ का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। यहां जौ से प्राप्‍त होने वाले कुछ स्‍वास्‍थ्‍य लाभों को सूचीबद्ध किया गया है। आइए जाने उपभोग करने पर जौ के फायदे क्‍या हैं।

जौ के फायदे रक्‍तचाप के लिए – 
रक्‍तचाप संबंधी परेशानियों को दूर करने के लिए जौ बहुत ही फायदेमंद होती है। नियमित रूप से अपने आहार में जौ को शामिल कर आप रक्‍तचाप असंतुलन को नियंत्रित कर सकते हैं। क्‍योंकि जौ में पोटेशियम की अच्‍छी मात्रा होती है जो शरीर में सोडियम (नमक) के उच्‍च स्‍तर को संतुलित कर सकता है। 2006 में हुए एक अध्‍ययन से पता चलता है कि नियमित रूप से जौ के साबुत अनाज का सेवन करने से उच्‍च रक्‍तचाप और वजन बढ़ना जैसी समस्‍याओं को रोका जा सकता है। क्‍योंकि इसमें फाइबर की अच्‍छी मात्रा होती है। यदि आप भी उच्‍च रक्‍तचाप के लक्षणों से बचना चाहते हैं तो जौ को अपने दैनिक आहार का हिस्‍सा बनाना चाहिए।

जौ खाने के फायदे कोलेस्‍ट्रॉल कम करे – 
शरीर में खराब कोलेस्‍ट्रॉल की अधिक मात्रा आपके लिए हानिकारक हो सकती है। खराब कोलेस्‍ट्रॉल आपकी रक्‍तवाहिकाओं और विशेष रूप से हृदय को नुकसान पहुंचा सकता है। लेकिन आप नियमित रूप से जौ का सेवन कर कोलेस्‍ट्रॉल की उच्‍च मात्रा को कम कर सकते हैं। जौ की नियमित खपत करने से सीरम लिपिड और कोलेस्‍ट्रॉल के स्‍तर को कम किया जा सकता है। 2009 में किये गए एक अध्‍ययन से पता चलता है कि 12 सप्‍ताह तक नियमित रूप से जौ का सेवन करने पर यह शरीर में कुल कोलेस्‍ट्रॉल, एलडीएल और ट्राइग्लिसराइड के स्‍तर को काफी हद तक कम कर सकता है जो कि खराब कोलेस्‍ट्रॉल होता है। जबकि यह एचडील या अच्‍छे कोलेस्‍ट्रॉल के स्‍तर को प्रभावित नहीं करता है। 

जौ की रोटी के फायदे वजन कम करे – 
यदि आप अपना वजन कम करने का प्रयास कर रहे हैं तो जौ आपकी मदद कर सकता है। जौ में आवश्‍यक विटामिन और खनिज पदार्थों की अच्‍छी मात्रा होती है। इसके अलावा जौ में फाइबर और प्रोटीन भी भरपूर होता है जबकि इसमें वसा, कोलेस्‍ट्रॉल और चीनी आदि सामग्री बहुत ही कम होती है। जिसके कारण जौ का वजन कम करने वाले उत्‍पादों के रूप में उपयोग किया जा सकता है। आप अपने मोटापे को कम करने के लिए जौ की रोटी का सेवन कर सकते हैं। क्‍योंकि इसमें घुलनशील फाइबर अच्‍छी मात्रा में होता है। यह वसा और कोलेस्‍ट्रॉल को रक्‍त में अवशोषित होने से रोकता है। यदि आप वजन कम करने वाले अन्‍य उपायों को अपना रहे हैं तो नियमित व्‍यायाम और जौ के सेवन को भी शामिल करें। यह आपको वजन घटाने में सहायक होता है।

जौ घास के फायदे कैंसर के लिए –
अध्‍ययनों से पता चलता है कि जौ घास में कैंसर रोधी और एंटी-इंफ्लामेटरी गुण होते हैं। लेकिन जौ घास के साथ ही जौ का नियमित सेवन करना आपको कैंसर के लक्षणों से बचा सकता है। जौ के साबुत अनाज में फाइटोकेमिकल्‍स सामग्री जैसे फोलेट, फ्लेवोनाइड्स और लिग्नन्‍स (flavonoids and lignans) होते हैं जो कैंसर की संभावनाओं को कम करते हैं। इसके अलावा कुछ अध्‍ययन भी पुष्टि करते हैं कि जौ में एंटी-कार्सिनोजेनिक गुण होते हैं जो कई प्रकार के कैंसरों का इलाज करने में मदद करते हैं। आप भी कैंसर के लक्षणों को कम करने या भविष्‍य में कैंसर के प्रभाव से बचने के लिए जौ का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। 

जौ के लाभ हृदय स्‍वास्‍थ्‍य के लिए – 
हृदय संबंधी समस्‍याओं को दूर करने के लिए आप जौ का उपयोग कर सकते हैं। एथेरोस्‍क्लेरोसिस (Atherosclerosis) एक ऐसी स्थिति है जब धमनी की दीवारें कोलेस्‍ट्रॉल जैसी फैटी सामग्री के जमावट या जमाव के कारण मोटी हो जाती हैं। जिससे स्‍वतंत्र रक्‍त परिसंचरण में व्‍यवधान होता है। जौ में नियासिन जो कि एक बी विटामिन है यह अच्‍छी मात्रा में होता है। यह समग्र कोलेस्‍ट्रॉल और लिपोप्रोटीन के स्‍तर को कम करने और हृदय संबंधी समस्‍याओं को कम करने में सहायक होता है।

एक अध्‍ययन से पता लता है कि उच्‍च रक्‍तचाप के रोगियों के लिए जौ एक अच्‍छा आहार होता है। 

जौ खाने के लाभ अस्‍थमा रोगी के लिए – 
अस्‍थमा और अन्‍य श्वसन समस्‍याओं वाले रोगी के लिए जौ का नियमित सेवन लाभकारी होता है। अस्‍थमा रोगी को नियमित रूप से जौ खाने के फायदे अस्‍थमा के लक्षणों को कम करने में मदद करते हैं। यह एलर्जी आदि के प्रभाव को भी आसानी से दूर कर सकता है। इस तरह के लाभ प्राप्‍त करने के लिए आप गेहूं के आटे में जौ के आटे को मिला कर उपभोग कर सकते हैं।

जौ के सत्‍तू के फायदे मधुमेह के लिए –
मधुमेह एक गंभीर स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍या है जिसके उपचार के लिए जौ एक अच्‍छा औषधीय विकल्‍प है। जौ अपने उच्‍च फाइबर सामग्री के कारण मधुमेह प्रकार 2 का प्रभावी इलाज करने में सहायक होता है। अध्‍ययनों से इस बात की पुष्टि भी हो चुकी है। जौ में आवश्‍यक विटामिन और खनिज पदार्थ होते हैं विशेष रूप से बीटा-ग्‍लूकन घुलनशील फाइबर। 2006 में हुए एक अन्‍य अध्‍ययन से पता चलता है कि बीटा-ग्‍लूकन घुलनशील फाइबर वाले जौ का सेवन करने से इंसुलिन प्रतिरोध को कम किया जा सकता है। जिससे मधुमेह के लक्षणों को कम करने में मदद मिलती है। यदि आप भी मधुमेह रोगी हैं तो अपने नियमित आहार में जौ को शामिल कर लाभ प्राप्‍त कर सकते हैं।

जौ के पानी पीने के फायदे एनीमिया के लिए – 
जौ पौष्टिक होने के साथ ही आयरन में समृद्ध खाद्य पदार्थ है। क्‍योंकि यह प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने और सर्दी, फ्लू जैसी समस्‍याओं से बचाता है। इसमें मौजूद आयरन की उच्‍च मात्रा रक्‍त के उत्‍पादन को बढ़ाने में सहायक होती है। इसके अलावा जौ के पोषक तत्‍व गुर्दे की कार्य प्रणाली को व्‍यवस्थित करने और लाल रक्‍त कोशिकाओं के उत्‍पादन को बढ़ाने में प्रभावी योगदान देते हैं। इस तरह से आप अपने शरीर में खून की कमी होने के कारण एनीमिया और अन्‍य प्रकार की रक्‍त संबंधी समस्‍याओं को दूर करने के लिए जौ के पानी का उपयोग कर सकते हैं।

जौ के औषधीय गुण गठिया के लिए – 
गठिया शरीर के जोड़ों में होने वाली एक विशेष सूजन संबंधी समस्‍या है जो कि बहुत ही पीड़ादायक होती है। लेकिन अध्‍ययनों से पता चलता है कि उच्‍च फाइबर युक्‍त आहार का नियमित सेवन करने से गठिया के लक्षणों को कम किया जा सकता है। जौ में फाइबर के साथ ही अन्‍य खनिज पदार्थ और पोषक तत्‍व उच्‍च मात्रा में होते हैं। जिसके कारण यह गठिया के दर्द और सूजन को कम करने में सहायक होता है। अध्‍ययनों से यह भी पता चलता है कि जौ में मौजूद घुलनशील फाइबर शरीर को पोषक तत्‍वों को बेहतर तरीके से अवशोषित करने में मदद करते हैं। जिससे जोड़ों या गठिया की सूजन और सूजन संबंधी दर्द को कम करने में मदद मिलती है।

जौ के सत्‍तू खाने के फायदे हड्डियों के लिए –
जौ में कई आवश्‍यक विटामिन और खनिज पदार्थ होते हैं। जिनमे फॉस्‍फोरस, मैंगनीज, कैल्शियम और कॉपर शामिल हैं। ये सभी पोषक तत्‍व हड्डियों और दांतों को स्‍वस्‍थ रखने में सहायक होते हैं। अध्‍ययनों से यह भी पता चलता है कि 1 गिलास जौ का पानी पीने से 11 गिलास दूध में मौजूद कैल्शियम की मात्रा प्राप्‍त की जा सकता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि नियमित रूप से जौ के पानी का सेवन कर ऑस्टियोपोरोसिस जैसी गंभीर बीमारी का इलाज किया जा सकता है।

जौ के गुण पथरी का इलाज करे –
पथरी भी एक गंभीर समस्‍या है। जौ महिलाओं में पित्‍ताशय की पथरी के गठन को प्रभावी रूप से रोक सकता है। हम सभी जानते हैं कि जौ में फाइबर  की अच्‍छी मात्रा होती है जिसके कारण यह पित्‍त एसिड के स्राव को कम करने में सहायक होता है। जिससे इं‍सुलिन संवेदनशीलता बढ़ती है और शरीर में ट्रारइग्लिसराइड्स (triglycerides) के स्‍तर को कम करने में मदद मिलती है। जो महिलाएं नियमित रूप से फाइबर युक्‍त आहार का सेवन करती हैं उनमें अन्‍य महिलाओं की तुलना में पथरी होने की संभावना कम होती है। जौ को गुर्दे की पथरी रोकने और गुर्दे को साफ और डिटॉक्सिफाई करके गुर्दे के स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ाने में भी जाना जाता है। हालांकि इस बात का समर्थन करने के लिए पर्याप्‍त शोध नहीं हैं।

जौ दलिया के लाभ पाचन के लिए –
यदि आप पाचन संबंधी समस्‍या से परेशान हैं और उपचार खोज रहे हैं तो जौ के दलिया का सेवन करें। क्‍योंकि जौ में अन्‍य अनाजों की तुलना में फाइबर की अच्‍छी मात्रा होती है। 1 कप जौ में लगभग 13 ग्राम फाइबर होता है। जौ में मौजूद अघुलनशील फाइबर आंत में अच्‍छे जीवाणुओं को लाभ पहुंचाने के लिए प्रोबायोटिक के रूप में काम करता है। साथ ही यह मल त्‍याग को आसान बनाने और पाचन प्रणाली को मजबूत बनाने में भी सहायक होता है। आप भी अपनी पाचन संबंधी समस्‍याओं को दूर करने के लिए जौ के लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

गर्भवती महिलाओं के लिए जौ फायदेमंद – 
गर्भवती महिलाओं के लिए जौ एक अच्‍छा आहार माना जाता है। क्‍योंकि इसमें वे सभी पोषक तत्‍व अच्‍छी मात्रा में होते हैं जो गर्भावस्‍था के दौरान बहुत ही आवश्‍यक होते हैं। जौ का पानी महिलाओं के पाचन को ठीक करने और मॉर्निंग सिकनेस को कम करने में भी सहायक है। इसके अलावा यह गर्भवास्‍था के दौरान महिलाओं के शरीर में रक्‍त शर्करा के स्‍तर को भी निय‍ंत्रित करता है। महिलाएं गर्भावस्‍था के दौरान शारीरिक कमजोरी और अन्‍य समस्‍याओं को दूर करने के लिए जौ को अपने नियमित आहार में शामिल कर लाभ प्राप्त कर सकती हैं।

जौ से करें नपुंसकता का इलाज –
जौ घास में आर्गिनिन और नाइट्रिक ऑक्‍साइड होता है। ये दोनों ही घटक पेनाइल इरेक्‍शन के लिए जिम्‍मदार होते हैं और पेनाइन डिस्‍फंक्‍शन का इलाज कर सकते हैं। जौ को शुक्राणुओं और अंडे की कोशिकाओं के उत्‍पादन को बढ़ाने के लिए भी जाना जाता है। इस तरह से जौ घास का नियमित सेवन करने से पुरुषों और महिलाओं दोनों में यौन प्रदर्शन को बढ़ाने और नपुंसकता का इलाज करने में सहायक होती है। यदि आप भी ऐसी ही समस्‍या का सामना कर रहे हैं तो जौ घास का उपयोग कर सकते हैं।

जौ का इस्‍तेमाल मूत्र पथ संक्रमण रोके – 
नियमित रूप से जौ के पानी का सेवन करना आपको मूत्र पथ संबंधी संक्रमण से बचा सकता है। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि जौ के पानी को सबसे अच्‍छे मूत्र वर्धक के रूप में उपयोग किया जाता है। 2012 में हुए एक अध्‍ययन में उन लोगों को शामिल किया गया जिन्‍हें मूत्र पथ संबंधी संक्रमण था। इन लोगों को नियमित रूप से कुछ दिनों तक जौ के पानी का सेवन कराया गया। जिससे कुछ ही दिनों में उन्‍हें मूत्र पथ संबंधी संक्रमण से छुटकारा मिल गया। जिससे साबित होता है कि नियमित रूप से जौ के पानी का सेवन करने से मूत्र पथ संबंधी संक्रमणों का प्रभावी इलाज किया जा सकता है।

बारले बेनिफिट्स फॉर स्किन – 
आप जौ के स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी लाभों को प्राप्‍त करने के साथ ही त्‍वचा संबंधी लाभ भी प्राप्‍त कर सकते हैं। जौ केवल दिखने में छोटे होते हैं लेकिन इनमें एंटीऑक्‍सीडेंट की उच्‍च मात्रा होती है। साथ ही इसमें पोषक तत्‍व भी भरपूर मात्रा में होते हैं जो त्वचा को स्‍वस्‍थ रखने में सहायक होते हैं। आइए जाने जौ के फायदे त्‍वचा के लिए क्‍या होते हैं।

जौ में होते हैं उपचार गुण –
जौ में मौजूद जस्‍ता त्‍वचा को ठीक करने और घावों का उपचार करने में सहायक होता है। आप अपनी त्वचा में मौजूद घावों और फोड़ों का इलाज करने के लिए जौ के पाउडर को मौखिक रूप से सेवन कर सकते हैं। इसके अलावा कुछ दिनों तक जौ के पाउडर का पेस्‍ट बनाकर घाव पर लगाएं। ऐसा करने से भी आपको त्‍वचा के घावों को दूर करने में मदद मिल सकती है।

जौ के लाभ त्‍वचा की लोच में सुधार करे – 
जौ में सेलेनियम की उच्‍च मात्रा होती है। यह घटक त्‍वचा की लोच बनाए रखने में मदद करती है। आप अपनी त्वचा को टोंड रखने के लिए भी जौ का उपयोग कर सकते हैं। नियमित रूप से इस्तेमाल करने पर जौ के एंटीऑक्‍सीडेंट त्‍वचा कोशिकाओं को फ्री रेडिकल्‍स के प्रभाव से बचाते हैं। सेलेनियम अग्नयाशय, हृदय और प्रतिरक्षा प्रणाली के उचित कामकाज के लिए महत्‍वपूर्ण है। इसलिए आप अपने दैनिक आहार में जौ का उपयोग कर अपनी त्‍वचा को स्‍वस्‍थ और सुंदर रख सकते हैं।

जौ का इस्‍तेमाल त्‍वचा को चमकदार बनाये – 
जौ में एंटी-इंफ्लामेटरी गुण होते हैं। जब आप अपने चेहरे पर जौ का पानी लगाते हैं तो यह मुंहासों को कम करने में मदद करता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्‍सीडेंट त्‍वचा के संक्रमण को दूर करने में प्रभावी योगदान देता है। जौ को एक सौम्‍य एक्सफोलिएटर के रूप में भी उपयोग किया जाता है। जिससे यह त्‍वचा में प्राकृतिक तेल की अतिरिक्‍त मात्रा को कम करने में मदद करता है।

आप अपने चेहरे को चमकदार बनाने के लिए जौ के आटे और नींबू के रस का पेस्‍ट अपने चेहरे पर लगाएं। लगभग 10 से 15 मिनिट के बाद या इस पेस्‍ट को पूरी तरह से सूखने के बाद आप अपने चेहरे को ठंडे पानी से धो लें। ऐसा करने से आपके चेहरे के दाग धब्‍बे को दूर कर त्‍वचा को चमकदार बनाया जा सकता है।

जौ के लाभ त्‍वचा को हाइड्रेट रखे – 
एक अध्‍ययन से पता चलता है कि 8 सप्‍ताह तक पूरक के रूप में जौ का नियमित सेवन करने से त्‍वचा में प्राकृतिक नमी को बनाए रखने में मदद मिलती है। जिससे आपको उम्र बढ़ने संबंधी लक्षणों को रोकने में मदद मिलती है।

जौ का प्रयोग त्‍वचा छिद्रों का इलाज करे – 
नियमित रूप से जौ का पानी पीने से आपके चेहरे पर मुंहासे होने की संभावना को कम किया जा सकता है। आप अपने चेहरे को धोने के लिए भी जौ के पानी का उपयोग कर सकते हैं। जौ में एजेलेइक एसिड होता है जो मुंहासों से लड़ने और बंद रोमछिद्रों का इलाज करने में सहायक होता है। इस तरह से आप अपने चेहरे के बंद त्‍वचा छिद्रों का इलाज करने के लिए जौ के लाभ प्राप्‍त कर सकते हैं।

जौ के फायदे बालों के लिए –
जौ में मौजूद पोषक तत्‍व और खनिज पदार्थ न केवल आपके स्‍वास्‍थ्‍य बल्कि बालों के लिए भी फायदेमंद होते हैं। आइए जाने बालों के लिए जौ के लाभ क्‍या हैं।

जौ के लाभ बालों को बढ़ने में मदद करे – 
जौ में प्रोसीनेडिन-बी3 (procyanidin-B3), थियामिन और नियासिन जैसे विटामिन अच्‍छी मात्रा में होते हैं। ये सभी घटक बालों को वृद्धि करने में सहायक होते हैं। यदि आप भी अपने बालों को बढ़ाना चाहते हैं तो जौ का दैनिक आधार पर उपयोग कर सकते हैं।

जौ का प्रयोग बाल झड़ने से रोके –
जौ में आयरन और कॉपर की अच्‍छी मात्रा होती है जिससे यह एनीमिया जैसी रक्‍त संबंधी बीमारियों का प्रभावी इलाज कर सकता है। एनीमिया (anemia) बालों के झड़ने की प्रमुख बजह भी हो सकती है। लेकिन ऐसी स्थिति में जौ का नियमित सेवन आपको एनीमिया और बालों के झड़ने संबंधी समस्‍या से बचा सकता है।

जौ का उपयोग बालों को भूरा होने से बचाये – 
आप अपने बालों के प्राकृतिक रंग को बनाए रखने के लिए जौ का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। जौ में कॉपर की अच्‍छी मात्रा होती है जो मेलेनिन (melanin) के उत्‍पादन को बढ़ाता है। जिससे बालों को प्राकृतिक रंग प्राप्‍त करने में मदद मिलती है।

जौ का पानी कैसे बनाएँ  –
बारले वाटर या जौ का पानी बनाना बहुत ही आसान है। इसके लिए आपको आसान सी विधि का उपयोग करना चाहिए।

एक लीटर पानी में दो बड़े चम्मच जौ डालकर उबालें। उबालने के वक्त ढक्कन को अच्छी तरह से लगा दें ताकि जौ के दाने अच्छी तरह से पक जायें। जब यह मिश्रण पानी के साथ घुलकर हल्के गुलाबी रंग का पारदर्शी मिश्रण बन जायें तो समझ जाना चाहिए कि यह पीने के लिए पूरी तरह से तैयार है। इस मिश्रण को एक जालीदार कपड़े से छान लें। अच्छी सेहत पाने के लिए रोजाना 1 से 2 कप जौ का पानी पियें। अगर आपको इसका स्वाद पसंद नही आ रहा है तो इसमें नींबू, शहद और नमक भी डाल सकते हैं। आप छिलके वाले और बिना छिलके वाले दोनों में से किसी भी प्रकार के जौ ले सकते हैं। छिलके वाले में ज्यादा फाइबर होता है और पकाने में ज्यादा समय लगता है इसलिए बिना छिलके वाले पकाने में आसान हैं।

जौ को अपने दैनिक आहार में कैसे लें – 
आप अपने दैनिक आहार में इस सुपर फुड को कई प्रकार से उपयोग कर सकते हैं। आइए जाने यह हमारे दैनिक आहार का हिस्‍सा किस प्रकार बन सकता है।

आप सूप बनाने के लिए जौ के बीजों का उपयोग कर सकते हैं। जो कि आपके सूप के स्‍वाद को बढ़ाने और आपको अधिक ऊर्जा दिलाने में मदद करता है।
  • आप जौ के बीजों को पके हुए चावल या उबले हुए आलू के साथ मिलकार उपभोग कर सकते हैं।
  • आप कई प्रकार के आटे वाली रोटी का सेवन करें जिसमें जौ के आटे को भी मिलाया जा सकता है।
  • आप सुबह के नाश्‍ते के रूप में जौ के दलिया का इस्‍तेमाल कर सकते हैं।
  • भोजन पकाने और अन्‍य व्‍यंजनों के लिए जौ के आटे का उपयोग किया जा सकता है।
  • आप अपने शरीर की ऊर्जा बनाए रखने के लिए जौ के पानी का सेवन कर सकते हैं।
  • जौ के बीजों के पाउडर को आप स्‍मूदी या मिल्‍कशेक में मिलकर सेवन कर सकते हैं।


जौ का सत्‍तू रेसिपी – 
जौ का सत्‍तू आपको गर्मी से राहत दिलाने का सबसे अच्‍छा तरीका है। यह स्‍वादिष्‍ट होने के साथ ही पौष्टिक भी होता है। इसके अलावा जौ की ठंडी तासीर गर्मी के समय में आपके शरीर को ठंडा बनाए रखने में मदद करती है। जौ का सत्‍तू बनाने की विधि बहुत ही सरल है।

जौ का सत्‍तू बनाने के लिए आप 1 कप जौ के बीजों को लें और इसे हल्‍की आंच में भून लें। जब यह अच्‍छी तरह से भुन जाए तो इसे एक प्‍लेट में लेकर ठंडा होने दें और फिर इसे बारीक पाउडर में पीस लें। इसके अलावा आप इसमें कुछ अन्‍य खाद्य पदार्थों को भी मिला सकते हैं जो कि चने के सत्‍तू को बनाने में उपयोग किये जाते हैं। आप सभी प्रकार के सत्‍तू बनाने वाले उत्‍पादों का उपयोग कर सकते हैं। जैसे कि

2 कप भुने हुए चने, 1 कप जौ का दलिया, 1 कप गेंहू का दलिया, ½ कप चीनी, ½ छोटा चम्‍म्‍च काला नमक, 2 मध्‍ययम आकार के नींबू का रस, ¼ छोटा चम्‍मच सादा नमक, ¼ छोटा चम्‍मच जीरा और पुदीने की पत्तियां।

पुदीने की पत्तियों और नींबू को छोड़ इन सभी सूखे उत्‍पादों को आप पीसकर पाउडर बनाएं। फिर आप अपनी आवश्‍यकता के अनुसार जौ के सत्‍तू का सेवन कर सकते हैं।

जौ का दिलया बनाने की विधि –
जौ का दलिया भी बनाना बहुत ही आसान है। जौ का दलिया बनाने के लिए आपको ½ कप जौ, 4 कप पानी, 1 मध्‍ययम आकार की दालचीनी का टुकड़ा, शहद और दूध।

जौ का दिलया बनाने का तरीका –

आप जौ को 1 कप पानी में 1 घंटे के लिए भीगने दें। लगभग 1 घंटे के बाद आप इसमें 3 कप पानी और मिलाएं और इसमें दालचीनी मिलाकर इसे उबलने दें। लगभग 30 मिनिट या जब तक जौ नरम न हो जाए तब उबालें और अच्‍छी तरह से पकने के बाद आप इसमें अपनी इच्‍छानुसार दूध और शहद मिलाएं। आपके जौ का दलिया तैयार है। बस आप गर्मागरम दलिया का सेवन कर सकते हैं।

लेकिन जो खाद्य पदार्थ स्‍वास्‍थ्‍य के लिए फायदेमंद होते हैं वे कुछ लोगों के लिए नुकसान भी पैदा कर सकते हैं। आइए जाने जौ खाने के नुकसान क्‍या है।

जौ के नुकसान – 
हम सभी जानते हैं कि किसी भी खाद्य पदार्थ का अधिक मात्रा में सेवन करना नुकसानदायक हो सकता है। ठीक उसी तरह से जौ का भी कम मात्रा में सेवन करना फायदेमेंद होता है। अन्‍यथा यह आपके लिए कुछ नुकसान का कारण भी बन सकता है।
  • अधिक मात्रा में जौ का सेवन करने से आपको पेट में ऐंठन, गैस और पेट फूलना जैसी समस्‍या हो सकती है।
  • गर्भावस्‍था के दौरान महिलाओं को जौ का अधिक मात्रा में सेवन करने से बचना चाहिए।
  • जौ में ग्‍लूटन की मौजूदगी होती है। जिसके कारण अधिक उपभोग करने से यह सीलियाक बीमारी (Celiac disease) के लक्षणों को बढ़ा सकता है।
  • जौ के बीज रक्‍त शर्करा को नियंत्रित करने में प्रभावी होते हैं। लेकिन अधिक मात्रा में इनका सेवन करने से मधुमेह रोगी को बचना चाहिए। क्‍योंकि यह शरीर में रक्‍त शर्करा के स्‍तर को बहुत ही निम्‍न स्‍तर पर ले जा सकते हैं।
  • यदि आपको जौ और इस परिवार से संबंधित खाद्य पदार्थों से एलर्जी है तो आपको जौ का सेवन करने से बचना चाहिए।
  • यदि आप किसी विशेष प्रकार की दवाओं का सेवन कर रहे हैं। और औषधीय लाभ के लिए जौ का सेवन करना चाहते हैं तो पहले अपने डॉक्‍टर से अनुमति लें।


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मकई या मक्का (कॉर्न) के फायदे और नुकसान

Advantages and disadvantages of corn or corn -
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मकई जिसे मक्का या कॉर्न के नाम से भी जाना जाता है आहार के रूप में उपयोग किया जाने वाला विशेष खाद्य पदार्थ है। मकई या मक्‍का (Maize) दुनिया के सबसे प्रसिद्ध अनाजों में अपना स्‍थान रखता है और कई देशों में यह मुख्‍य भोजन के रूप में उपयोग किया जाता है। मकई के स्‍वास्‍थय लाभ (health benefits) बहुत अधिक होते हैं यह मधुमेह को कम करने, निम्‍न रक्‍तचाप को ठीक करने, वजन कम करने और जन्‍म के समय तंत्रिका ट्यूब दोष आदि को कम करने में मदद करता है।

मकई (मक्का) क्‍या है –
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मक्‍का या मकई एक अनाज का पौधा (grain plant) है जो मेक्सिको में पैदा हुआ था। मकई के कर्नेल या बीजों में बहुत से पोषक तत्‍व होते हैं जिनके कारण इनका उपभोग करना लाभकारी होता है। मक्‍के की कई प्रजातियां होती है जो विविधता के आधार पर वे कई रंगों के होते हैं। मक्‍का का एक और प्रकार होता है जिसे मीठा मक्‍का (sweet corn) कहा जाता है जिनमें पोषक तत्‍वों के साथ चीनी अधिक मात्रा में होती है और स्‍टार्च बहुत ही कम मात्रा में होता है।

मक्‍का में पाए जाने वाले पोषक तत्‍व – 
स्‍वस्‍थ्‍य रहने और दैनिक चयापचय (metabolism) के लिए कैलोरी की आवश्‍यक्‍ता होती है। मक्‍का केवल कैलोरी ही प्रदान नहीं करता है बल्कि विटामिन ए, बी, ई और कई खनिजों का समृद्ध स्रोत भी है। साथ ही साथ मक्‍का में वसा, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रे भी होते हैं। इसमें फाइबर की अच्‍छी मात्रा होती है जो कब्‍ज, बवासीर और कोलोरेक्‍टल कैंसर जैसे पाचन रोगों की रोकथाम करने में मदद करते हैं। मक्‍का में उपस्थित एंटीऑक्सिडेंट, एंटी-कैंसरजन्‍य एजेंट के रूप में भी कार्य करते हैं और अल्जाइमर (Alzheimer’s) जैसे मानशिक रोग को रोकने में मदद करते हैं।

मकई के फायदे – 
मकई में उपस्थिति पोषक तत्‍वों (Nutrients) के कारण यह हमारे स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बेहद लाभकारी होता है। इस खाद्य पदार्थ का उपयोग कर आप अपने भोजन को स्‍वादिष्‍ट बना सकते हैं। साथ ही इसमें फाइटोकेमिकल्‍स (phytochemicals) भी होते हैं जो पुरानी बीमारियों के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करता है। आइए जाने मकई के फायदे क्‍या है।

कैंसर को रोकने में मकई खाने के फायदे – 
कॉर्नेल विश्वविद्यालय में किए गए अध्‍ययनों के अनुसार, मकई में एंटीऑक्‍सीडेंट का एक समृद्ध स्रोत है जो कैंसर पैदा करने वाले मुक्‍त कणों (free radicals) से लड़ता है। कई अन्‍य खाद्य पदार्थों की अपेक्षा मक्‍के का उपयोग करने से आप अपने आहार में एंटीऑक्सिडेंट (antioxidant) गुणों को बढ़ा सकते हैं। यह फेरिलिक एसिड नामक एक फेनोलिक यौगिक का एक समृद्ध स्रोत है। मक्‍के में एंटी-कार्सिनोजेनिक (anti-carcinogenic) एजेंट होता है जो स्‍तन और यृकत कैंसर के कारण ट्यूमर से लड़ने में मदद करता है। बैंगनी मक्‍का में पाए जाने वाले एंथोकाइनिन, मुक्‍त कणों को खोजने का काम करते हैं जो कैंसर का कारण होते हैं। विभिन्‍न प्रकार के कैंसरों के प्रभाव को एंटीऑक्‍सीडेंट (antioxidant) के सहायता से कम किया जा सकता है।

मकई तेल के फायदे दिल के लिए –
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ऐसा माना जाता है कि मकई के तेल में एंथैथोजेनिक प्रभाव (antiatherogenic effect) होते हैं जो कोलेस्‍ट्रोल के स्‍तर को कम करने में मदद करता है। इस प्रकार यह कार्डियोवैस्‍कुलर (cardiovascular ) बीमारियों से हमारी रक्षा करता है। मकई का तेल दिल के स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बहुत फायदेमंद होता है क्‍योंकि इसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड बहुत ही अच्‍छी मात्रा में होता है जो खराब कोलेस्‍ट्रोल (bad cholesterol) को नियंत्रित करता है। मकई खराब कोलेस्‍ट्रोल को हटा कर धमनीयों को अवरुद्ध होने से रोकता है इस कारण यह आपके रक्‍तचाप को कम करता है और दिल का दौरा और स्‍ट्रोक (heart attack and stroke) के खतरे को कम करता है।

मक्‍का का उपयोग रोके अल्जाइमर रोग –
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थाइमाइन की अच्‍छा मात्रा मकई मे होती है जो आपकी शक्ति को बढ़ाने के साथ-साथ मस्तिष्‍क कोशिका और ज्ञान संब‍धी क्रिया (cognitive function) को बढ़ाने के लिए मदद करता है। एसिटाइलॉक्लिन के संश्‍लेषण के लिए भी इसकी आवश्‍यकता होती है, जो स्‍मृति के लिए आवश्‍यक एक न्‍यूरोट्रांसमीटर है और जिसकी कमी के कारण मानसिक क्रिया (mental function) और अल्‍जाइमर रोग से संबंधित परेशानियां हो सकती हैं।
कॉर्न खाने के फायदे आंखों के लिए – 
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पीले मकई के दानों में कैरोटीनोइड नामक पदार्थ होता है जो मैकुलर अपघटन (macular degeneration) के खतरे को कम करते हैं जिसका सीधा संबंध आपके देखने की क्षमता से संबंधित होता है। मक्‍के में मौजूद बीटा कैरोटीन विटामिन ए बनाने में मदद करता है। इस प्रकार यह आपके देखने की क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है।

मक्‍का खाने के फायदे मधुमेह को रोके –
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भुट्टा जैसे कार्बिनिक फल (Organic fruits) और सब्जियां मधुमेह के लक्षणों को कम करने में मदद करते हैं। मकई के दानों का नियमित सेवन करने से इंसुलिन की अनुपस्थिति में मधुमेह को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। साथ ही मकई के दानों में उपस्थित फाइटोकेमिकल्‍स उच्‍च रक्‍तचाप को कम करने में मदद करते हैं। फाइटोकेमिकल्‍स शरीर में इंसुलिन के अवशोषण और मुक्‍त (absorption and release ) होने को नियंत्रित करते हैं। इस प्रकार मक्‍का सामान्‍य जीवनशैली बनाए रखने में मदद करते हैं। इसके अलावा मक्‍का में पैंटोथिनेक एसिड भी होता है यह विटामिन बी, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और लिपिड चयापचय में मदद करता है। इसलिए यह एड्रेनल ग्रंथियों (adrenal glands) के कामकाज को बढ़ा कर तनाव को कम करता है।

मकई खाने के फायदे गर्भवती महिलाओं के लिए –
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फोलिक एसिड की अच्‍छी मात्रा होने के कारण मकई गर्भवती महिलाओं (Pregnant women) के लिए बहुत ही महत्‍वपूर्ण होता है। गर्भवती महिलाओं में फोलिक एसिड की कमी के कारण होने वाले बच्‍चे का वजन कम हो सकता है और साथ ही जन्‍म के समय तंत्रिका ट्यूब मे भी नुकसान (neural tube defects) हो सकता है।

इसलिए गर्भवती महिलाओं ( pregnant women) को अपने आहार मे मकई को शामिल करना चाहिए क्‍योंकि इससे मां और बच्‍चे दोनों को स्‍वास्‍थ्‍य लाभ प्राप्‍त होता है। हांलाकि उच्‍च रक्‍तचाप या हाथ-पैर की सूजन होने की स्थति में डॉक्‍टर से संपर्क करना चाहिए।

मक्‍का के गुण वजन बढ़ाने में सहायक – 
वे लोग जो अपना वजन बढ़ाने (weight gain) का प्रयास कर रहे हैं उनके लिए भुट्टे का सेवन करना लाभकारी होता है। ऐसे लोग जिनका वजन कम होता है उन्‍हें अपने आहार में कैलोरी (calories) की मात्रा बढ़ाने की आवश्‍यकता होती है ताकि उनके शरीर का वजन बढ़ सके। मक्‍के में कैलोरी और कार्बोस बहुत अधिक मात्रा में होते हैं जो आपके शरीर के वजन को बढ़ाने में मदद करते हैं।

यदि आपका वजन सामान्‍य से कम है तो आप अपने आहार में मक्‍के को शामिल करें क्‍योंकि इसके एक कप दानों में 130 कैलोरी की मात्रा होती है।

मकई का उपयोग एनीमिया के उपचार में  –
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विटामिन बी 12 और फोलिक एसिड (folic acid) की कमी के कारण एनीमिया होता है। मकई में आयरन बहुत ही अच्‍छी मात्रा में होता है जो नयी लाल रक्‍त कोशिकाओं के निर्माण के लिए आवश्‍यक खनिजों में से एक है। मकई का नियमित और संतुलित उपभोग कर आप लोहे की कमी से होने वाले एनीमिया रोग (anemia) की संभावनाओं को कम कर सकते हैं।

स्वीट कॉर्न के फायदे कोलेस्‍ट्रोल को कम करे – 
कोलेस्‍ट्रोल का उत्‍पादन यकृत द्वारा किया जाता है। आमतौर पर कोलेस्‍ट्रोल दो प्रकार के होते है अच्‍छे कोलेस्‍ट्रोल (HDL or good cholesterol) और खराब कोलेस्‍ट्रोल होते हैं। खराब कोलेस्‍ट्रोल फैटी भोजन का सेवन करने के कारण बढ़ता है जो आपके दिल को कमजोर करता है कार्डियोवैस्‍कुलर बीमारीयों का कारण बनता है। मीठे मकई विटामिन सी, कैरोटीनोइड और बायोफ्लावोनोइड्स में समृद्ध होते है जो कोलेस्‍ट्रॉल के स्‍तर को कम करके रक्‍त प्रवाह को बढ़ावा देते हैं जो आपके दिल को स्‍वस्‍थ्‍य रखने के लिए आवश्‍यक होता है। मकइ के तेल मे एंथैथोजेनिक (antiatherogenic) प्रभाव होता है जो शरीर द्वारा कोलेस्‍ट्रोल के अवशोषण को कम करता है और आपके शरीर को स्‍वस्‍थ्‍य रखता है। अगर आपको लगता है कि आपके शरीर में कोलेस्‍ट्रोल (cholesterol) की मात्रा बढ़ने लगी है तो आप मक्‍का का सेवन कर इसे नियंत्रित कर सकते हैं।

मक्‍का खाने के फायदे ऊर्जा बढ़ाए – 
स्‍टार्च की अधिक मात्रा होने के कारण मकई को स्‍टार्च वाली सब्‍जी माना जाता है। मक्‍का में कार्बोहाइड्रेट की भरपूर मात्रा होती है जो आपको त्‍वरित और लंबे समय तक ऊर्जा दिलाने में मदद करता है। मक्‍का आपके मस्तिष्‍क और तंत्रिका तंत्र (nervous system) की कार्य क्षमता को भी सुधारता है। लगभग एक कप मक्‍का में 29 ग्राम कार्बोस होता है जो आपकी ऊर्जा (Energy) को बढ़ाने में मदद करता है। इस कारण यह एथलीटों के लिए बहुत फायदेमंद होता है क्‍योंकि उन्‍हें ज्‍यादा कार्बोस की आवश्‍यकता होती है। आप भी अपनी ऊर्जा को बढ़ाने के लिए मक्‍के को अपने आहार में सेवन कर सकते हैं।

भुट्टा का लाभ पाचन के लिए –
फाइबर की अच्‍छी मात्रा मकई में होती है जिसमें घुलनशील और अघुलनशील ( soluble and insoluble) दोनों ही प्रकार के फाइबर होते हैं। घुलनशील फाइबर एक जेल में बदलकर कोलेस्‍ट्रोल के अवशोषण को रोकने में मदद करते हैं जबकी अघुलनशील फाइबर नरम और भारी मल को बढ़ावा देकर कब्‍ज और आंतों की समस्‍याओं को रोकता है। जिससे इर्रेबल बाउल सिंड्रोम और दस्‍त की संभावना को कम किया जा सकता है। इस प्रकार यह पाचन समस्‍याओं (digestive problems) जैसे कब्‍ज, बवासीर के साथ-साथ कोलन कैंसर को रोकने में मदद करता है। मक्‍का मे दोनों ही प्रकार के फाइबर (fiber) होते हैं लेकिंन इसमें अघुलनशील फाइबर की मात्रा ज्‍यादा होती है जो आपके पाचन संबंधी समस्‍याओं को दूर करने में लाभकारी होते हैं।

मक्‍का के गुण ग्‍लूटेन फ्री – 
आमतौर पर अन्‍य खाद्य आहारों के तरह ही मक्‍का (maize) का उपयोग किया जाता है। वास्‍तव में यह अनाज नहीं है और इसमें कोई ग्‍लूटेन नहीं होता है। ग्‍लूटेन का उपभोग करने के कई हानिकारक लक्षण होते हैं जिनमें पाचन, क्रैम्पिंग (cramping), दस्‍त, कब्‍ज, थकान और त्‍वाचा संबंधी समस्‍याएं होती हैं। ग्‍लूटेन कई लोगों को नकारात्‍मक रूप से प्रभावित कर सकता है। इसलिए आप अपने स्‍वास्‍थ्‍य को बेहतर बनाने और ऊर्जा बढ़ाने के लिए ग्‍लूटेन मुक्‍त (gluten-free) मकई का सेवन कर सकते हैं।

भुट्टे के लाभ त्‍वचा समस्‍याओं के लिए –
स्‍टार्च (starch ) का प्रयोग कई कॉस्‍मेटिक उत्‍पादों में उपयोग किया जाता है जो कि मक्‍का में भरपूर मात्रा में होता है। इस कारण मक्‍का त्‍वचा के चकते और जलन को शांत करने के लिए उपयोग किया जाता है। रासायनिक सौंदर्य उत्‍पादों के निर्माण के समय इनमें कई कैंसरजन्‍य (Carcinogenic) पेट्रोलियम उत्‍पादों को मिलाया जाता है जो त्‍वचा छिद्रों को बंद कर सकते हैं और त्‍वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए आप अपनी त्‍वचा को हानिकारक सौंदर्य उत्‍पादों से बचाने के लिए मकई का उपयोग कर सकते हैं।

मकई तेल का उपयोग बालों के लिए –
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आपके बालों को नरम और रेशमी बनाने के लिए आप मक्‍के के तेल का उपयोग कर सकते हैं। इसमें ओमेगा-3 और ओमेगा-6 फैटी एसिड की संतुलित मात्रा होती है जो सूजन को नियंत्रित करने में मदद करता है और सिर को शुष्‍क और परतदार होने से बचाता है। इसमें उपस्थित फैटी एसिड कोशिकाओं में वसा के परिवहन मे मदद करता है जिससे के बालों के टूटने और गिरने (brittle hair or hair fall) की समस्‍या को कम करने में मदद मिलती है।

इसके लिए आप मकई के तेल को आधा मिनिट के लिए गर्म करें और अपनी उंगलीयों की सहायता से अपने सिर पर लगाएं और मालिश करें। इसे 15 मिनिट के लिए सिर पर लगे रहने दें और फिर हल्‍के शैम्‍पू (Light shampoo) से धो लें यह आपके बालों को नरम और रेशमी बनाने में मदद करता है।

मक्‍का खाने के नुकसान – 
कोर्न के फायदे हमारे स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बहुत अधिक और नुकसान बहुत ही कम होते हैं। य‍दि भुट्टे का सेवन कम मात्रा में किया जाता है तो यह हमारे लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। यदि ज्‍यादा मात्रा में सेवन किया जाए तो इसके भी कुछ नुकसान हो सकते हैं जो इस प्रकार हैं :

  • मकई में फाइबर की मात्रा बहुत अधिक होती है। य‍दि आप ज्‍यादा मात्रा में इसका सेवन करते हैं तो अपच, पेट की ऐंठन जैसी समस्‍याओं को बढ़ा सकता है।
  • मीठे मकई को कच्‍चे नहीं खाना चाहिए क्‍योंकि इससे दस्‍त हो सकता है और यह आंतों के कई विकारों को भी बढ़ा सकता है।
  • भुट्टा मधुमेह से ग्रस्‍त लोगों को नकारात्‍मक रूप से प्रभावित कर सकता है क्‍योंकि इसमे कार्बोहाइड्रेट अधिक मात्रा मे होता है जो रक्‍त शर्करा के स्‍तर को बढ़ा सकता है। इसलिए मधुमेह रोगी को अधिक मात्रा में मकई का सेवन करने से बचना चाहिए।
  • कुछ लोगों में मकई का ज्‍यादा सेवन करने से गैस, पेट फूलना और सूजन जैसी समस्‍याएं हो सकती है।
  • जो लोग आहार के रूप में मकई का उपयोग करते हैं उन्‍हें ओस्टियोपोरोसिस का खतरा हो सकता है, क्‍योंकि मीठे मकई में कैल्शियम बहुत ही कम मात्रा मे होता है।
  • जो लोग अपना वजन कम करना चाहते हैं उन्‍हें मकई का ज्‍यादा सेवन नहीं करना चाहिए। क्‍योंकि यह उनके वजन को और ज्‍यादा बढ़ा सकता है।
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भुट्टा खाने के फायदे और नुकसान

Advantages and disadvantages of eating corn.
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क्या आप जानतें हैं भुट्टा खाने के फायदे वजन बढ़ाने के साथ कई बीमारियों को भी दूर करते है आज हम आपको गरम – गरम भुट्टा खाने के फायदे और नुकसान बताने वाले हैं। भुट्टा जिसे मक्का या कॉर्न के नाम से भी जाना जाता है आहार के रूप में उपयोग किया जाने वाला विशेष खाद्य पदार्थ है। भुट्टा (Maize) दुनिया के सबसे प्रसिद्ध अनाजों में अपना स्‍थान रखता है और कई देशों में यह मुख्‍य भोजन के रूप में उपयोग किया जाता है। लेकिन बारिश का मौसम में भुट्टे को भूनकर या सेंककर खाने का अलग ही मजा होता है। भुट्टे को पोषण के हिसाब से बेहतरीन माना जाता है। नींबू और नमक लगे भुने हुए भुट्टे के स्‍वास्‍थय लाभ (health benefits) बहुत अधिक होते हैं यह मधुमेह को कम करने, निम्‍न रक्‍तचाप को ठीक करने, वजन कम करने में मदद करता है। हम आपको इस लेख में बता रहे हैं, भुट्टा खाने के सेहत से जुड़े ऐसे कई फायदे, जो आपको हैरान कर देंगे।

भुट्टा (मक्का) क्‍या है –
भुट्टा या मकई (मक्‍का) एक अनाज का पौधा (grain plant) है जो मेक्सिको में पैदा हुआ था। भुट्टे के कर्नेल या बीजों में बहुत से पोषक तत्‍व होते हैं जिनके कारण इनका उपभोग करना लाभकारी होता है। भुट्टे की बहुत सी प्रजातियां होती है जो विविधता के आधार पर कई रंगों के होते हैं। भुट्टे का एक और प्रकार होता है जिसे स्‍वीट कॉर्न (sweet corn) या अमेरिकन कॉर्न कहा जाता है जिनमें पोषक तत्‍वों के साथ चीनी अधिक मात्रा में होती है और स्‍टार्च बहुत ही कम मात्रा में होता है। इसका उपयोग हम भूनकर या सेंककर खाने के लिए करते हैं।

भुट्टा में पाए जाने वाले पोषक तत्‍व – 
स्‍वस्‍थ्‍य रहने और दैनिक चयापचय (metabolism) के लिए कैलोरी की आवश्‍यक्‍ता होती है। भुट्टा केवल कैलोरी ही प्रदान नहीं करता है बल्कि विटामिन ए, बी, ई और कई खनिजों का समृद्ध स्रोत भी है। साथ ही साथ भुट्टा में वसा, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रे भी होते हैं। इसमें फाइबर की अच्‍छी मात्रा होती है जो कब्‍ज, बवासीर और कोलोरेक्‍टल कैंसर जैसे पाचन रोगों की रोकथाम करने में मदद करते हैं। मक्‍का में उपस्थित एंटीऑक्सिडेंट, एंटी-कैंसरजन्‍य एजेंट के रूप में भी कार्य करते हैं और अल्जाइमर (Alzheimer’s) जैसे मानशिक रोग को रोकने में मदद करते हैं।

भुट्टा खाने के फायदे – 
भुट्टा में उपस्थिति पोषक तत्‍वों (Nutrients) के कारण यह हमारे स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बेहद लाभकारी होता है। इस खाद्य पदार्थ का उपयोग कर आप अपने भोजन को स्‍वादिष्‍ट बना सकते हैं। साथ ही इसमें फाइटोकेमिकल्‍स (phytochemicals) भी होते हैं जो पुरानी बीमारियों के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करता है। आइए जाने भुट्टा खाने के फायदे क्‍या है।

भुट्टा खाने के फायदे कैंसर को रोकने में –
कॉर्नेल विश्वविद्यालय में किए गए अध्‍ययनों के अनुसार, भुट्टा एंटीऑक्‍सीडेंट का एक समृद्ध स्रोत है जो कैंसर पैदा करने वाले मुक्‍त कणों (free radicals) से लड़ता है। कई अन्‍य खाद्य पदार्थों की अपेक्षा भुट्टे का उपयोग करने से आप अपने आहार में एंटीऑक्सिडेंट (antioxidant) गुणों को बढ़ा सकते हैं। यह फेरिलिक एसिड नामक एक फेनोलिक यौगिक का एक समृद्ध स्रोत है। भुट्टा में एंटी-कार्सिनोजेनिक (anti-carcinogenic) एजेंट होता है जो स्‍तन और यृकत कैंसर के कारण ट्यूमर से लड़ने में मदद करता है। बैंगनी भुट्टा में पाए जाने वाले एंथोकाइनिन, मुक्‍त कणों को खोजने का काम करते हैं जो कैंसर का कारण होते हैं। विभिन्‍न प्रकार के कैंसरों के प्रभाव को एंटीऑक्‍सीडेंट (antioxidant) के सहायता से कम किया जा सकता है।

भुना हुआ भुट्टा के फायदे दिल के लिए –
ऐसा माना जाता है कि भुने हुए भुट्टे में एंथैथोजेनिक प्रभाव (antiatherogenic effect) होते हैं जो कोलेस्‍ट्रोल के स्‍तर को कम करने में मदद करता है। इस प्रकार यह कार्डियोवैस्‍कुलर (cardiovascular ) बीमारियों से हमारी रक्षा करता है। भुना हुआ भुट्टा दिल के स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बहुत फायदेमंद होता है क्‍योंकि इसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड बहुत ही अच्‍छी मात्रा में होता है जो खराब कोलेस्‍ट्रोल (bad cholesterol) को नियंत्रित करता है। भुट्टा खराब कोलेस्‍ट्रोल को हटा कर धमनीयों को अवरुद्ध होने से रोकता है इस कारण यह आपके रक्‍तचाप को कम करता है और दिल का दौरा और स्‍ट्रोक (heart attack and stroke) के खतरे को कम करता है।

भुट्टा का उपयोग रोके अल्जाइमर रोग –
थाइमाइन की अच्‍छा मात्रा भुट्टे में होती है जो आपकी शक्ति को बढ़ाने के साथ-साथ मस्तिष्‍क कोशिका और ज्ञान संब‍धी क्रिया (cognitive function) को बढ़ाने के लिए मदद करता है। एसिटाइलॉक्लिन के संश्‍लेषण के लिए भी इसकी आवश्‍यकता होती है, जो स्‍मृति के लिए आवश्‍यक एक न्‍यूरोट्रांसमीटर है और जिसकी कमी के कारण मानसिक क्रिया (mental function) और अल्‍जाइमर रोग से संबंधित परेशानियां हो सकती हैं।

भुट्टा खाने के फायदे आंखों के लिए –
पीले भुट्टे के दानों में कैरोटीनोइड नामक पदार्थ होता है जो मैकुलर अपघटन (macular degeneration) के खतरे को कम करते हैं जिसका सीधा संबंध आपके देखने की क्षमता से संबंधित होता है। भुट्टे में मौजूद बीटा कैरोटीन विटामिन ए बनाने में मदद करता है। इस प्रकार यह आपके देखने की क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है।

भुट्टा खाने के लाभ मधुमेह को रोके – 
भुट्टा जैसे कार्बिनिक फल (Organic fruits) और सब्जियां मधुमेह के लक्षणों को कम करने में मदद करते हैं। भुट्टे के दानों का सेवन करने से इंसुलिन की अनुपस्थिति में मधुमेह को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। साथ ही भुट्टा में उपस्थित फाइटोकेमिकल्‍स उच्‍च रक्‍तचाप को कम करने में मदद करते हैं। फाइटोकेमिकल्‍स शरीर में इंसुलिन के अवशोषण और मुक्‍त (absorption and release ) होने को नियंत्रित करते हैं। इस प्रकार भुट्टा सामान्‍य जीवनशैली बनाए रखने में मदद करते हैं। इसके अलावा भुट्टे के दानों में पैंटोथिनेक एसिड भी होता है यह विटामिन बी, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और लिपिड चयापचय में मदद करता है। इसलिए यह एड्रेनल ग्रंथियों (adrenal glands) के कामकाज को बढ़ा कर तनाव को कम करता है।

भुट्टा के औषधीय गुण गर्भवती महिलाओं के लिए – 
फोलिक एसिड की अच्‍छी मात्रा होने के कारण भुट्टा गर्भवती महिलाओं (Pregnant women) के लिए बहुत ही महत्‍वपूर्ण होता है। गर्भवती महिलाओं में फोलिक एसिड की कमी के कारण होने वाले बच्‍चे का वजन कम हो सकता है और साथ ही जन्‍म के समय तंत्रिका ट्यूब मे भी नुकसान (neural tube defects) हो सकता है।

इसलिए गर्भवती महिलाओं ( pregnant women) को अपने आहार मे भुट्टा को शामिल करना चाहिए क्‍योंकि इससे मां और बच्‍चे दोनों को स्‍वास्‍थ्‍य लाभ प्राप्‍त होता है। हांलाकि उच्‍च रक्‍तचाप या हाथ-पैर की सूजन होने की स्थति में भुट्टा खाने से पहले डॉक्‍टर से संपर्क करना चाहिए।

भुट्टा के गुण वजन बढ़ाने में सहायक –
वे लोग जो अपना वजन बढ़ाने (weight gain) का प्रयास कर रहे हैं उनके लिए भुट्टे का सेवन करना लाभकारी होता है। ऐसे लोग जिनका वजन कम होता है उन्‍हें अपने आहार में कैलोरी (calories) की मात्रा बढ़ाने की आवश्‍यकता होती है ताकि उनके शरीर का वजन बढ़ सके। भुट्टा में कैलोरी और कार्बोस बहुत अधिक मात्रा में होते हैं जो आपके शरीर के वजन को बढ़ाने में मदद करते हैं।

यदि आपका वजन सामान्‍य से कम है तो आप अपने आहार में भुट्टा को शामिल करें क्‍योंकि इसके एक कप दानों में 130 कैलोरी की मात्रा होती है।

भुट्टा का उपयोग एनीमिया के उपचार में  – 
विटामिन बी 12 और फोलिक एसिड (folic acid) की कमी के कारण एनीमिया होता है। भुट्टे में आयरन बहुत ही अच्‍छी मात्रा में होता है जो नयी लाल रक्‍त कोशिकाओं के निर्माण के लिए आवश्‍यक खनिजों में से एक है। भुट्टे का नियमित और संतुलित उपभोग कर आप लोहे की कमी से होने वाले एनीमिया रोग (anaemia) की संभावनाओं को कम कर सकते हैं।

भुने भुट्टा के फायदे कोलेस्ट्रॉल को कम करें – 
कोलेस्‍ट्रोल का उत्‍पादन यकृत द्वारा किया जाता है। आमतौर पर कोलेस्‍ट्रोल दो प्रकार के होते है अच्‍छे कोलेस्‍ट्रोल (HDL or good cholesterol) और खराब कोलेस्‍ट्रोल होते हैं। खराब कोलेस्‍ट्रोल फैटी भोजन का सेवन करने के कारण बढ़ता है जो आपके दिल को कमजोर करता है कार्डियोवैस्‍कुलर बीमारीयों का कारण बनता है। भुट्टा विटामिन सी, कैरोटीनोइड और बायोफ्लावोनोइड्स में समृद्ध होते है जो कोलेस्‍ट्रॉल के स्‍तर को कम करके रक्‍त प्रवाह को बढ़ावा देते हैं जो आपके दिल को स्‍वस्‍थ्‍य रखने के लिए आवश्‍यक होता है। भुने हुए भुट्टे मे एंथैथोजेनिक (antiatherogenic) प्रभाव होता है जो शरीर द्वारा कोलेस्‍ट्रोल के अवशोषण को कम करता है और आपके शरीर को स्‍वस्‍थ्‍य रखता है। अगर आपको लगता है कि आपके शरीर में कोलेस्‍ट्रोल (cholesterol) की मात्रा बढ़ने लगी है तो आप भुट्टे का सेवन कर इसे नियंत्रित कर सकते हैं।

भुट्टा खाने के फायदे ऊर्जा बढ़ाए – 
स्‍टार्च की अधिक मात्रा होने के कारण भुट्टे को स्‍टार्च वाला आहार माना जाता है। भुट्टा में कार्बोहाइड्रेट की भरपूर मात्रा होती है जो आपको त्‍वरित और लंबे समय तक ऊर्जा दिलाने में मदद करता है। भुट्टा आपके मस्तिष्‍क और तंत्रिका तंत्र (nervous system) की कार्य क्षमता को भी सुधारता है। लगभग एक कप भुट्टे के दानों में 29 ग्राम कार्बोस होता है जो आपकी ऊर्जा (Energy) को बढ़ाने में मदद करता है। इस कारण यह एथलीटों के लिए बहुत फायदेमंद होता है क्‍योंकि उन्‍हें ज्‍यादा कार्बोस की आवश्‍यकता होती है। आप भी अपनी ऊर्जा को बढ़ाने के लिए भुट्टा को अपने आहार में सेवन कर सकते हैं।

भुट्टा का लाभ पाचन के लिए –
फाइबर की अच्‍छी मात्रा भुट्टा में होती है जिसमें घुलनशील और अघुलनशील ( soluble and insoluble) दोनों ही प्रकार के फाइबर होते हैं। घुलनशील फाइबर एक जेल में बदलकर कोलेस्‍ट्रोल के अवशोषण को रोकने में मदद करते हैं जबकी अघुलनशील फाइबर नरम और भारी मल को बढ़ावा देकर कब्‍ज और आंतों की समस्‍याओं को रोकता है। जिससे इर्रेबल बाउल सिंड्रोम और दस्‍त की संभावना को कम किया जा सकता है। इस प्रकार यह पाचन समस्‍याओं (digestive problems) जैसे कब्‍ज, बवासीर के साथ-साथ कोलन कैंसर को रोकने में मदद करता है। भुट्टा में दोनों ही प्रकार के फाइबर (fiber) होते हैं लेकिंन इसमें अघुलनशील फाइबर की मात्रा ज्‍यादा होती है जो आपके पाचन संबंधी समस्‍याओं को दूर करने में लाभकारी होते हैं।

भुट्टा के गुण ग्‍लूटेन फ्री –
आमतौर पर अन्‍य खाद्य आहारों के तरह ही भुट्टा (maize) का उपयोग किया जाता है। वास्‍तव में यह अनाज नहीं है और इसमें कोई ग्‍लूटेन नहीं होता है। ग्‍लूटेन का उपभोग करने के कई हानिकारक लक्षण होते हैं जिनमें पाचन, क्रैम्पिंग (cramping), दस्‍त, कब्‍ज, थकान और त्‍वाचा संबंधी समस्‍याएं होती हैं। ग्‍लूटेन कई लोगों को नकारात्‍मक रूप से प्रभावित कर सकता है। इसलिए आप अपने स्‍वास्‍थ्‍य को बेहतर बनाने और ऊर्जा बढ़ाने के लिए ग्‍लूटेन मुक्‍त (gluten-free) भुट्टा का सेवन कर सकते हैं।

भुट्टा खाने के नुकसान – 
भुट्टा या कॉर्न के फायदे हमारे स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बहुत अधिक और नुकसान बहुत ही कम होते हैं। यदि भुट्टे का सेवन कम मात्रा में किया जाता है तो यह हमारे लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। लेकिन ज्‍यादा मात्रा में सेवन किया जाए तो इसके भी कुछ नुकसान हो सकते हैं जो इस प्रकार हैं :
  • भुट्टा में फाइबर की मात्रा बहुत अधिक होती है। यदि आप ज्‍यादा मात्रा में इसका सेवन करते हैं तो अपच, पेट की ऐंठन जैसी समस्‍याओं को बढ़ा सकता है।
  • मीठे मकई या भुट्टा को कच्‍चे नहीं खाना चाहिए क्‍योंकि इससे दस्‍त हो सकता है और यह आंतों के कई विकारों को भी बढ़ा सकता है।
  • भुट्टा मधुमेह से ग्रस्‍त लोगों को नकारात्‍मक रूप से प्रभावित कर सकता है क्‍योंकि इसमे कार्बोहाइड्रेट अधिक मात्रा मे होता है जो रक्‍त शर्करा के स्‍तर को बढ़ा सकता है। इसलिए मधुमेह रोगी को अधिक मात्रा में भुने भुट्टे का सेवन करने से बचना चाहिए।
  • कुछ लोगों में भुट्टे का ज्‍यादा सेवन करने से गैस, पेट फूलना और सूजन जैसी समस्‍याएं हो सकती है।
  • जो लोग आहार के रूप में भुट्टा का उपयोग करते हैं उन्‍हें ओस्टियोपोरोसिस का खतरा हो सकता है, क्‍योंकि भुट्टे या मीठे मकई में कैल्शियम बहुत ही कम मात्रा मे होता है।
  • जो लोग अपना वजन कम करना चाहते हैं उन्‍हें भुट्टे का ज्‍यादा सेवन नहीं करना चाहिए। क्‍योंकि यह उनके वजन को और ज्‍यादा बढ़ा सकता है।
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कूटू के फायदे, उपयोग और नुकसान

Advantages, uses and disadvantages of Kutu -
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कूटू एक प्रकार का आनाज है जो गेहूं का सबसे अच्‍छा विकल्‍प माना जाता है। एक सुपर फूड होने के नाते कूटू खाने के फायदे कई आयुर्वेदिक लाभ के लिए होते हैं। क्‍योंकि कूटू में बहुत से पोषक तत्‍व और औषधीय गुण होते हैं। कूटू का उपयोग सामान्‍य रूप से खाद्य आहार के रूप में किया जाता है। कूटू का इस्‍तेमाल करना आपको हृदय रोग, डायबिटीज, कैंसर, पाचन आदि समस्‍याओं से बचा सकता है। कुट्टू के आटे का सेवन सबसे ज्‍याद व्रत रखने के दौरान किया जाता है। कुट्टू के आटे का सेवन करना आपको न केवल ऊर्जा बल्कि स्‍वास्‍थ्‍य लाभ भी दिलाता है। अपने पौष्टिक तत्‍व और तासीर के कारण कुट्टू खाद्य पदार्थों के रूप में एक अच्‍छा विकल्‍प है। इस लेख में हम आपको कुट्टू खाने के फायदे और नुकसान संबंधी जानकारी बता रहे हैं। आइए जाने कुट्टू के बारे में।
कुट्टू क्‍या है – 
बकव्‍हीट (Buckwheat) या कुट्टू एक खाद्य पदार्थ है जिसके नाम से ऐसा लगता है कि यह गेहूं के समान है। लेकिन ऐसा नहीं है कुट्टू गेहूं या अनाज से संबंधित नहीं है। कुट्टू का वानस्पतिक नाम फागोपाइरम एस्‍कुलेंटम मोएंक (Fagopyrum esculentum Moench) है जो कि पोलियगनेसी (Polygonaceae) फेमिली से संबंधित है। यह एक प्रकार की घास है जो कि एक प्रकार के फल (rhubarb) का बीज होते हैं। हालांकि इसे बकव्‍हीट कहा जाता है क्‍योंकि इसे गेहूं की तरह ही उपयोग किया जाता है। कुट्टू का आटा बहुत ही लोकप्रिय है क्‍योंकि यह लस मुक्‍त और बेहद स्‍वास्‍थ्‍य वर्धक होता है। कुट्टू में पोषक तत्‍व भी भरपूर और उच्‍च मात्रा में होते हैं।

कुट्टू की तासीर क्‍या होती है – 
जानकारों के अनुसार कुट्टू के आटे का सेवन करना बहुत ही फायदेमंद होता है। क्‍योंकि कुट्टू की तासीर गर्म होती है। आमतौर पर व्रत रखने के दौरान कुट्टू के आटे का उपयोग विभिन्‍न प्रकार के व्‍यंजनों को तैयार करने के लिए किया जाता है। लेकिन अपनी गर्म तासीर होने के कारण कुट्टू का इस्‍तेमाल कई स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं के लिए औषधी के रूप में भी किया जाता है।
कुट्टू का पेड़ – 
यह एक प्रकार का खाद्य अनाज वाला पेड़ है जो सामान्‍य रूप से घास परिवार से संबंधित है। इसे कुछ लोग टेटी या ब्‍लेट टिटी (Titi or Black Titi) भी कहते हैं। यह एक प्रकार की सदाबहार झाड़ी है या Cyrillaceae परिवार से संबंधित छोटे पेड़ होते हैं। यह पौधा 15 मीटर (लगभग 50 फीट तक) तक बढ़ सकता है। इस पौधे के पत्ते 4-5 सेमी (लगभग 1.5-2 इंच) तक लंबे हो सकते हैं। इस पौधे में सफेद या गुलाबी रंग के सुगंधित फूल होते हैं।

बकव्‍हीट का आटा किससे बनता है – 
खाद्य आहार के रूप में उपयोग किये जाने वाले कुट्टू के बारे में अधिकांश लोग पूछते हैं कि कुट्टू का आटा किससे बनता है। कुट्टू को बकव्‍हीट (Buckwheat) के नाम से जाना जाता है। देखने और सुनने में यह लगता है कि कुट्टू आनाज परिवार से संबंधित है। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी की यह अनाज न होकर घास परिवार के एक फल का बीज है। बकव्‍हीट के पौधे के एक तिकोना फल प्राप्‍त होता है जिसके बीज भी तिकोने होते हैं। इन बीजों को पीसकर ही कुट्टू का आटा प्राप्‍त किया जाता है। बकव्‍हीट पाउडर को ही कुट्टू के आटे के रूप में इस्‍तेमाल किया जाता है।

कुट्टू के पोषक तत्‍व – 
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कुट्टू का आटा अपने पोषक तत्‍वों की उच्‍च मात्रा के कारण औषधीय आहार के रूप में खाने के लिए उपयोग किया जाता है। कुट्टू के आटे में प्रोटीन की उच्‍च मात्रा होने के साथ ही बहुत से यौगिक भरपूर मात्रा में होते हैं। इस अद्भुट खाद्य पदार्थ में एंटीऑक्‍सीडेंट और खनिज पदार्थ बहुत अधिक मात्रा में होते हैं। जिसके कारण ही कुट्टू को दैनिक आहार में शामिल करना आपके लिए लाभकारी हो सकता है। लगभग 100 ग्राम कुट्टू में पाए जाने वाले पोषक तत्‍व इस प्रकार हैं।
  • कुल वसा – 3.4 ग्राम
  • सोडियम – 1 ग्राम
  • पोटेशियम – 460 मिली ग्राम
  • कुल कार्बोहाइड्रेट – 72 ग्राम
  • फाइबर – 10 ग्राम
  • प्रोटीन – 13 ग्राम

दैनिक आधार पर खनिज पदार्थों की आवश्‍यक मात्रा इस प्रकार है।
  • मैग्नीशियम – 57 %
  • आयरन – 12 %
  • विटामिन बी6 – 10 %
  • कैल्शियम – 1 %

कुट्टू खाने के फायदे – 
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बकव्‍हीट खाने के लाभ इसके अंदर मौजूद कई गुणों के कारण होते हैं। जिसके कारण कूटू के आटे का सेवन करना स्‍वास्‍थ्‍य, त्‍वचा सौंदर्य और बालों के लिए अच्‍छा माना जाता है। कई अध्‍ययनों से पता चलता है कि कुट्टू ग्‍लूटने फ्री स्‍यूडोसेरेल (Pseudocereal) खाद्य पदार्थ है। इस चमत्‍कारिक औषधीय खाद्य पदार्थ का सेवन करना आपको कई गंभीर बीमारियों से बचा सकता है। यदि कुट्टू के गुण के बारे में लोग पूछते हैं है कि कुट्टू में कौन-कौन से गुण पाए जाते हैं। कुट्टू के आटे में न्‍यूरोप्रोटेक्‍शन, एंटीकैंसर, एंटी-इंफ्लामेटरी, एंटीडायबिटिक आदि गुण होते हैं। इसके अलावा कुट्टू के आटे का इस्‍तेमाल उच्‍च रक्‍तचाप संबंधी लक्षणों को भी कम कर सकता है। इन्‍हीं गुणों के आधार पर हम इस लेख में कुट्टू के फायदे और नुकसान संबंधी बता रहे हैं।

कुट्टू के फायदे सेहत के लिए – 
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औषधीय लाभ से भरपूर कुट्टू स्‍वास्‍थ्‍य के लिए एक टॉनिक माना जाता है। हालांकि उपलब्‍धता के अभाव के कारण लोग इसे बहुत ही कम या विशेष अवसरों पर उपभोग करते हैं। लेकिन कम मात्रा में भी कुट्टू का सेवन करना आपको कई संभावित स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं से बचा सकता है। कुट्टू को आहार के रूप में शामिल करने से प्राप्‍त होने वाले लाभ इस प्रकार हैं।

कुट्टू के फायदे वजन कम करने में –
मोटापा घटाने का प्रयास करने वाले लोगों के लिए कुट्टू के लाभ हो सकते हैं। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि कुट्टू में फाइबर की उच्‍च मात्रा होती है। फाइबर की पर्याप्‍त मात्रा होने के कारण कुट्टू का सेवन करने से पेट अधिक समय तक भरा हुआ महसूस होता है। जिससे भूख को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। फाइबर शरीर को पर्याप्‍त ऊर्जा दिलाने के साथ ही चयापचय प्रणाली को भी बेहतर बनाता है। जिससे शरीर में जमा अतिरिक्‍त कैलोरी और वसा को ऊर्जा के रूप में परिवर्तित करने में मदद मिलती है। इन गुणों के कारण कुट्टू खाना मोटापा और बेली फैट को कम करने में प्रभावी माना जाता है। यदि आप भी अपने अतिरिक्‍त वजन को कम करना चाहते हैं तो कुट्टू का इस्‍तेमाल अपने दैनिक आहार में कर सकते हैं।

कूटू के फायदे कोलेस्‍ट्रॉल कम करे –
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शरीर में खराब कोलेस्‍ट्रॉल की उच्‍च मात्रा कई स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं का कारण बन सकता है। खराब कोलेस्‍ट्राल (LDL) को कम करने के लिए कुट्टू का उपयोग फायदेमंद माना जात है। उच्‍च कोलेस्‍ट्रॉल या हाइपरकोलेस्‍ट्रोलेमिया (hypercholesterolemia) मधुमेह, मोटापा और गठिया जैसी समस्‍याओं कारण बन सकता है। लेकिन कुट्टू के गुण शरीर में खराब और अच्‍छे कोलेस्‍ट्रॉल (HDL) के बीच संतुलन बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं। कुट्टू में मौजूद सक्रिय तत्‍व लिवर से पित्त एसिड के उत्‍सर्जन में सुधार करते हैं जो कोलेस्‍ट्रॉल के अवशोषण में मदद कर सकते हैं। इन सभी स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं की संभावना को कम करने के लिए घरेलू उपाय के रूप में कुट्टू का उपयोग किया जा सकता है।

कुट्टू खाने के फायदे हृदय रोग के लिए – 
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बकव्‍हीट में विशेष रूप से फ्लेवोनोइड्स (flavonoids) की उच्‍च मात्रा होती है जो कि एक फाइटोन्‍यूट्रिएंट्स (phytonutrients) है। ये महात्‍वपूर्ण यौगिक शरीर के लिए एंटीऑक्‍सीडेंट का काम करते हैं। ये एंटीऑक्‍सीडेंट हमारे शरीर को फ्री रेडिकल्‍स से बचाते हैं, और कोशिका चयापचय के रासायनिक उपोत्‍पाद (byproduct) को समाप्‍त करते हैं, जो हृदय रोगों का कारण बनते हैं। एक अध्‍ययन से पता चलता है कि फ्लेवोनॉयड्स रक्‍त में खराब कोलेस्‍ट्रॉल के स्‍तर को कम करते हैं। जिससे एथेरोस्‍क्‍लेरोसिस (atherosclerosis), दिल का दौरा और स्‍ट्रोक जैसी संभावनाओं को कम करने में मदद मिल सकती है। कूटू में मौजूद अन्‍य खनिज पदार्थ जैसे फास्‍फोरस, मैग्‍नीशियम, आयरन और मैंगनीज आदि भी रक्‍त परिसंचरण को बेहतर बनाने में सहायक होते हैं जो हृदय के लिए फायदेमंद होता है।

कुट्टू के लाभ कैंसर उपचार के लिए –
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कुट्टू का खाने का एक और विशेष फायदा कैंसर की संभावना को कम करने के लिए होता है। 2007 में हुए एक अध्‍ययन से पता चलता है कि कुट्टू को अपने आहार में शामिल करना कैंसर की रोकथाम करने में मदद कर सकता है। इसमें फाइबर की उच्‍च मात्रा होती है जो गैस्‍ट्रोइंटेस्‍टाइनल (gastrointestinal), कोलन कैंसर, गैस्ट्रिक और स्‍तन कैंसर की संभावना कम करने में प्रभावी होता है।

1 कप कुट्टू का सेवन करने से दैनिक आवश्‍यकता का लगभग 20 प्रतिशत फाइबर प्राप्त किया जा सकता है जिसमें किसी प्रकार की कैलोरी नहीं होती है। इसके अलावा एक अन्‍य अध्‍ययन से यह भी पता चलता है कि कुट्टू में एंटी-कार्सिनोजेनिक (anti-carcinogenic) प्रभाव भी होते हैं। यह मुख्‍य रूप से पोस्‍टमेनोपॉजल महिलाओं में स्‍तन कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकने में सहायक होता है।

कुट्टू खाने के लाभ मधुमेह के लिए –
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डायबिटीज के रोगियों के लिए कुट्टू का इस्‍तेमाल करना फायदेमंद हो सकता है। मधुमेह के लक्षणों को कम करने के लिए खाद्य आहार बेहतर विकल्‍प के रूप में कुट्टू का उपयोग किया जा सकता है। अध्‍ययनों से पता चलता है कि कुट्टू में मौजूद उच्‍च फाइबर रक्‍त शर्करा के स्‍तर को नियंत्रित करने में स‍हायक होते हैं। द इंग्‍लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार आहार फाइबर रक्‍त शर्करा के स्‍तर को काफी कम (यहां तक कि केवल 1 या 2 घंटों के भीतर ही) कर सकता है। कुट्टू में ब्‍लड ग्‍लूकोज कम करने वाले गुण इसमें मौजूद चिरो-इनोसिटोल (chiro-inositol) नामक यौगिक की मौजूदगी के कारण होते हैं। जिसके कारण मधुमेह टाइप 1 के लक्षणों को कम करने में मदद मिल सकती है। यदि आप भी मधुमेह रोगी हैं तो कुट्टू आपके लिए एक बेहतर आहार विकल्‍प हो सकता है।

कुट्टू के गुण पाचन में सुधार करे – 
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पाचन संबंधी समस्‍याओं को दूर करने के लिए अक्‍सर फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करने की सलाह दी जाती है। कुट्टू में भी फाइबर की उच्‍च मात्रा होती है जो पाचन प्रक्रिया को तेज करने और मल में थोक बढ़ाने में सहायक होता है। जिससे आंतों द्वारा मल को आसानी से प‍ारित करने में मदद मिलती है। कुट्टू के औषधीय गुण आंतों की मांसपेशियों के संकुचन को उत्‍तेजित करने में सहायक होते हैं जिससे चिड़चिड़ा आंत्र सिंड्रोम और दस्‍त को कम करने में मदद मिल सकती है। क्‍या आप भी पाचन संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। यदि ऐसा है तो आयुर्वेदिक उपचार के रूप में कुट्टू का प्रयोग किया जा सकता है।

कुट्टू का उपयोग प्रतिरक्षा शक्ति बढ़ाये – 
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बकव्‍हीट के फायदे बहुत अधिक हैं जिनमें इम्‍यूनिटी बूस्‍ट करना भी शामिल है। नियमित रूप से कुट्टू का उपभोग करना आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि इसमें कई शक्तिशाली एंटीऑक्‍सीडेंट होते हैं जो फ्री रेडिकल्‍स से हमारे शरीर की रक्षा करते हैं। इसके अलावा कुट्टू में टोकोफेरोल, फेनोलिक एसिड, सेलेनियम और फ्लेवोनोइड जैसे एंटीऑक्‍सीडेंट घटक होते हैं। कुट्टू के बीजों में विटामिन सी भी होता है जो कि एक विशेष एंटीऑक्‍सीडेंट है। इन सभी घटाकों की मौजूदगी के कारण कट्टू हमारी सेहत के लिए बेहतर विकल्‍प माना जाता है। साथ ही यह हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने और कई वायरल स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं से बचाने में प्रभावी होता है।

कुट्टू के औषधीय गुण अस्‍थमा के लिए –
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बकव्‍हीट के बीजों में मैग्नीशियम और विटामिन ई की उच्‍च मात्रा होती है। इन दोनों घटकों की पर्याप्‍त मात्रा बच्‍चों को अस्‍थमा जैसी श्वसन समस्‍याओं से बचाने में प्रभावी होते हैं। इसके अलावा अस्‍थमा के लिए कुट्टू खाने के फायदे इसलिए भी होते हैं क्‍योंकि इसमें प्रोटीन, फाइबर, फोलेट आदि की भरपूर मात्रा होती है। नीदरलैंड में हुए एक अध्‍ययन से पता चलता है कि जिन बच्‍चों को पर्याप्‍त मात्रा में कुट्टू का सेवन कराया जाता है उनमें अन्‍य बच्‍चों की तुलना में अस्‍थमा होने की संभावना कम होती है। कुट्टू में मौजूद पोषक प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने में और अस्‍थमा के लक्षणों को कम करने में अहम योगदान देते हैं। आप भी कुट्टू के ये सभी लाभ प्राप्‍त कर सकते हैं।

कुट्टू के प्रभाव एनीमिया रोके –
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कट्टू का उपभोग करना शरीर में खून की कमी को रोक सकता है। क्‍योंकि इसमें आयरन की पर्याप्‍त मात्रा होती है जो लाल रक्‍त कोशिकाओं के उत्‍पादन को बढ़ाने में सहायक होता है। शरीर में आयरन की कमी से एनीमिया हो सकता है। जिससे थकान, मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य में कमी, सुस्‍ती, सिरदर्द और अन्‍य गंभीर दुष्‍प्रभाव हो सकते हैं। एनीमिया का घरेलू उपचार करने के बेहतर विकल्‍प के रूप में कुट्टू का इस्‍तेमाल किया जा सकता है।

बकव्‍हीट के फायदे रक्‍तचाप के लिए –
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उच्‍च रक्‍तचाप संबंधी समस्‍याओं को कम करने में कुट्टू के फायदे होते हैं। क्‍योंकि कुट्टू में मैग्‍नीशियम की उच्‍च मात्रा होती है। मैग्‍नीशियम रक्‍त वाहिकाओं में रक्‍त परिसंचरण को बेहतर बनाने और इन्‍हें नरम रखने में मदद करता है। जिससे रक्‍त वाहिकाओं को आराम मिलता है। नियमित रूप से कट्टू का सेवन करना बिना किसी दुष्‍प्रभाव के उच्‍च रक्‍तचाप को नियंत्रित कर सकता है।

कूटू के गुण करे पथरी का इलाज –
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बकव्‍हीट या कट्टू में अघुलनशील फाइबर और प्रोटीन की उच्च मात्रा होती है। ये दोनों ही घटक पित्‍त की पथरी के निर्माण को रोकने में सहायक होते हैं। साथ ही यह शरीर में कोलेस्‍ट्रॉल के स्‍तर को भी नियंत्रित करता है। नियमित रूप से कुट्टू का सेवन करने से शरीर में बाइल एसिड के उत्‍पादन में वृद्धि हो सकती है। जो पित्त की पथरी से छुटकारा दिलाने में मदद करता है।

बकव्‍हीट के लाभ हड्डियां मजबूत करे –
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कुट्टू का नियमित सेवन करना आपकी हड्डियों को मजबूती दिलाने में मदद कर सकता है। क्‍योंकि कुट्टू में कैल्शियम, मैग्नीशियम, प्रोटीन, फास्‍फोरस और पोटेशियम आदि की अच्‍छी मात्रा होती है। कूटू का उपयोग करने से शरीर में इन सभी पोषक तत्वों की कमी को पूरा किया जा सकता है। आप भी अपनी हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए कुट्टू के औषधीय गुणों और पोषक तत्‍वों का इस्‍तेमाल कर सकते हैं।

कुट्टू के आटे का सेवन मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य के लिए –
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मस्तिष्‍क स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ावा देने के लिए कुट्टू के आटे का सेवन करना लाभदायक हो सकता है। कुट्टू के आटे में विभिन्‍न प्रकार के एंटीऑक्‍सीडेंट और तनाव रोधी गुण होते हैं। जिसके कारण कट्टू के आटे से बने व्‍यंजनों को खाने का फायदा आपके तनाव को कम करने में सहायक हो सकता है।

कुट्टू के फायदे स्किन के लिए –
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स्‍वास्‍थ्‍य लाभ होने के साथ ही कुट्टू के आटे के फायदे त्‍वचा के लिए भी होते हैं। आप कूटू का इस्‍तेमाल त्‍वचा संबंधी विभिन्‍न समस्‍याओं का प्राकृतिक उपचार करने के लिए भी कर सकते हैं। स्‍वस्‍थ और सुंदर त्‍वचा के लिए पर्याप्‍त मात्रा में पोषक तत्‍वों की आवश्‍यकता होती है। ऐसा माना जाता है कि कुट्टू में त्‍वचा को स्‍वस्‍थ रखने वाले लगभग सभी पोषक तत्व होते हैं। आइए जाने कुट्टू का आटा हमें किस प्रकार के त्‍वचा लाभ दिलाने में मदद करता है।

कुट्टू के आटे के लाभ ग्‍लोइंग स्किन के लिए –

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हर महिला और पुरुष की इच्‍छा होती है कि उनकी स्किन ग्‍लो करे। लेकिन आज पर्यावरणीय प्रदूषण के कारण ऐसा कर पाना मुश्किल लगता है। लेकिन ग्‍लोइंग स्किन के लिए कुट्टू का उपयोग किया जा सकता है। कुट्टू के आटे में विटामिन सी और विटामिन ई की अच्‍छी मात्रा होती है। जो त्‍वचा सौंदर्य को बढ़ाने में सहायक होते हैं। साथ ही विटामिन सी एंटीऑक्‍सीडेंट के रूप में त्‍वचा कोशिकाओं को फ्री रेडिकल्‍स के प्रभाव से बचाने में भी सहायक होते हैं।
ग्‍लोइंग स्किन पाने के लिए कुट्टू का उपयोग –
अपने चेहरे को सुंदर बनाए रखने के लिए आपको निम्‍न चीजों की आवश्‍यकता होती है।
  • कुट्टू का आटा – 2 चम्‍मच
  • बेसन – 2 चम्‍मच
  • गुलाब जल – 2 चम्‍मच

इन तीनों अवयवों को आपस में अच्‍छी तरह मिलाएं और एक फेस पैक की तरह चेहरे पर लगाएं। जब फेस पैक पूरी तरह से सूख जाए तब अपने चेहरे को सामान्‍य पानी से धो लें। नियमित रूप से इस फेस पैक का उपयोग सप्‍ताह में 2-3 बार किया जा सकता है।

कूटू के आटे के लाभ त्‍वचा की सुरक्षा करे –
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एंटीऑक्‍सीडेंट की भरपूर मात्रा होने के कारण कुट्टू फ्री रेडिकल्‍स से हमारी त्वचा कोशिकाओं को बचाता है। इसके अलावा ये एंटीऑक्‍सीडेंट लिपिड पेरोक्‍सीडेशन (Lipid peroxidation) के स्‍तर को भी कम करने में सहायक होते हैं। जिसके कारण कुट्टू के आटे का इस्‍तेमाल त्‍वचा को सूरज की पराबैंगनी किरणों से बचाने में मदद कर सकता है।

त्‍वचा के लिए कुट्टू का उपयोग –

आप अपनी त्‍वचा की सुरक्षा करने के लिए केवल कुट्टू के आटे और गुलाब जल के मिश्रण का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए आपको 1 चम्‍मच कुट्टू का आटा और 2 चम्‍मच गुलाब जल की आवश्‍यकता होती है। इन दोनों का मिश्रण बनाएं और 15 से 20 मिनिट के लिए इसे अपने चहरे पर लगाएं।

कुट्टू का इस्‍तेमाल एंटी-एजिंग गुण से भरपूर –
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समय से पहले उम्र बढ़ने के संकेत त्‍वचा के लिए पोषक तत्‍वों की कमी का इशारा करते हैं। कुट्टू में न्‍यूक्लिक एसिड (nucleic acids) की भरपूर मात्रा होती है जिसमें एंटी-एजिंग गुण होते हैं। नियमित रूप से कुट्टू का उपयोग करना एंजाइम क्रिया और हार्मोन संतुलन में भी सहायक हो सकता है।

एंटी-एजिंग के लिए कुट्टू का प्रयोग –

उम्र बढ़ने संबंधी लक्षणों को कम करने के लिए कुट्टू का आटा एक प्राकृतिक उपाय हो सकता है। इसके लिए आपको केवल 1 चम्‍मच कुट्टू का आटा और 2 चम्‍मच दूध की मलाई लेने की आवश्‍यकता है। आप इन दोनों का मिश्रण बनाएं और इसे अपने चेहरे पर लगाएं। यह मिश्रण आपके चहरे पर मौजूद झुर्रियों को दूर करने में मदद कर सकता है।

कुट्टू के फायदे बालों के लिए –
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त्‍वचा और स्‍वास्‍थ्‍य लाभ दिलाने के साथ ही कुट्टू के फायदे बालों के लिए भी होते हैं। आप अपनी बालों संबंधी विभिन्‍न समस्‍याओं का घरेलू उपचार करने के लिए कुट्टू का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। आइए जाने बालों के लिए कुट्टू के फायदे क्‍या हैं और यह कौन सी हेयर प्रोब्‍लम को दूर कर सकता है।

कुट्टू के लाभ हेयर ग्रोथ के लिए –
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आप अपने बालों में सामान्‍य रूप से होने वाली वृद्धि को और अधिक बढ़ाने के लिए कूटू का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। कुट्टू में अमीनो एसिड की भरपूर मात्रा होती है। अमीनो एसिड बालों को हेल्‍दी बनाने के साथ ही उनकी ग्रोथ को भी बढ़ाने में सहायक होता है। कुट्टू खाना आपकी सेहत के साथ ही बालों के लिए भी अच्‍छा हो सकता है।

कूटू के फायदे हेयर फॉल के लिए –
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क्‍या आप अपने झड़ते बालों से परेशान हैं। परेशान न हों क्‍योंकि कुट्टू का सेवन करना आपकी इस समस्‍या का भी समाधान कर सकता है। कुट्टू में पाया जाने वाला अमीनो एसिड बालों की वृद्धि के साथ उन्‍हें टूटने और बाल झड़ने से बचाने में मददगार हो सकता है।

हेयर प्रॉब्लम के लिए कुट्टू का उपयोग कैसे करें –
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बालों की रूकी हुई वृद्धि को बढ़ाने और उन्‍हें बालों को झड़ने से बचाने के लिए कुट्टू के आटे का प्रयोग हेयर पैक के रूप में किया जा सकता है।

इस हेयर पैक को बनाने के लिए आपको कुट्टू का आटा और दही चाहिए। आप एक कटोरी में दोनों की बराबर मात्रा लें और एक पेस्‍ट बनाएं। इस पेस्‍ट को नहाने से पहले अपने बालों में लगाएं। लगभग 25 से 30 मिनिट के बाद आप अपने बालों को धो लें।

खाने के लिए कुट्टू का उपयोग कैसे करें – 
पोषक तत्‍वों और औषधीय गुणों से भरपूर कुट्टू का उपयोग आहार के रूप में विभिन्‍न प्रकार से किया जा सकता है। आप भी अपनी सुविधा और पसंद के अनुसार कुट्टू का उपयोग कर व्‍यंजन तैयार कर सकते हैं। सामान्‍य रूप से कुट्टू का प्रयोग निम्‍न व्‍यंजनों को बनाने के लिए किया जाता है।

कुट्टू के आटे का इस्‍तेमाल कई प्रकार के व्‍यंजनों को बनाने के लिए किया जाता है। जो हमें कई हेल्‍थ बेनिफिट्स भी दिलाते हैं।
  • आमतौर पर विशेष अवसरों और व्रत आद‍ि के मौकों में फलाहार के रूप में कुट्टू का प्रयोग किया जाता है।
  • आप बकव्‍हीट फ्लोर का उपयोग करके स्‍वादिष्‍ट पुडियां और पकोड़े भी बना सकते हैं।
  • बच्‍चों को खुश करने के लिए कुट्टू के पराठे भी बनाए जा सकते हैं।
  • आप इडली या डोसा बनाने के लिए भी चावल के आटे में कूटू के आटे का इस्‍तेमाल कर सकते हैं।
  • भगवान को भोग लगाने के लिए कुट्टू का हलवा तैयार किया जा सकता है।


कुट्टू का सेवन कब करना चाहिए –
कुट्टू का सेवन करने का कोई समय निश्चित नहीं किया गया है। लेकिन विशेष रूप से कुट्टू का सेवन व्रत या उपवास रखने के दौरान किया जाता है। क्‍योंकि यह व्रत रखने के दौरान सबसे अच्‍छे फलाहारी विकल्‍प में से एक है। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि यह कोई अनाज न हो कर एक जंगली फल के बीज होते हैं। उपवास के दौरान कुट्टू खाना शरीर को ऊर्जा दिलाने में सहायक होते हैं।

कुट्टू के आटे को कितने समय तक रखा जा सकता है – 
कुट्टू का आटा बहुत ही पौष्टिक और विशेष खाद्य पदार्थों में से एक है। कुट्टू के आटे को उपयोग करने के बाद हवा बंद कंटेनर में रखना चाहिए। लेकिन आपको सलाह दी जाती है कि लगभग 1 माह के अंदर कुट्टू के आटे का इस्‍तेमाल कर लिया जाना चाहिए। अन्‍यथा कुट्टू के आटे में कीड़े हो सकते हैं।

बकव्‍हीट का उपयोग कितना करना चाहिए –
आयुर्वेद के अनुसार कुट्टू में औषधीय गुण होते हैं जो हमारे शरीर को स्‍वास्‍थ्‍य लाभ दिलाने में मदद करते हैं। लेकिन पौष्टिक होने के बाद भी इसका सेवन कम मात्रा में करना चाहिए। किसी व्‍यक्ति के लिए 2000 कैलोरी वाले आहार में फाइबर का दैनिक सेवन लगभग 25 ग्राम होना चाहिए। कुट्टू के आटे से 25 से 30 ग्राम प्रतिदन के अनुसार सेवन कर सकते हैं। अधिक मात्रा में सेवन करने पर कुट्टू खाने के नुकसान या दुष्‍प्रभाव भी हो सकते हैं।

बकव्‍हीट के आटे का चीला बनाने की विधि – 
कुट्टू के चीले बहुत ही स्‍वादिष्‍ट होते हैं जो उपवास के दौरान खाने के लिए सबसे अच्‍छे विकल्‍पों में से एक है। आप इस दौरान कुट्टू के आटे से बने चीले का स्‍वाद ले सकते हैं जो आपको ऊर्जा दिलाने के साथ ही स्‍वादिष्‍ट भी होते हैं। कुट्टू के चीले बनाना बहुत ही आसान है। आइए जाने कुट्टू के आटे से चीला बनाने की रेसिपी क्‍या है।
चीला बनाने के लिए आपको चाहिए –
  • 1½ कप कुट्टू का मोटा आटा
  • पानी
  • 1 अंड़ा
  • 2 छोटी चम्‍मच ब्राउन शुगर
  • ¼ चम्‍मच दालचीनी पाउडर
  • ¼ चम्‍मच नमक
  • कोलंडर छोटे और मध्‍यम आकार का
  • खाना पकाने का तेल

कुट्टू का चीला बनाने का तरीका –
चीला बनाने से पहले आप कुट्टू के मोटे आटे या दलिया को किसी बर्तन में 4 घंटों तक भिगोएं। अच्‍छी तरह से फूलने के बाद इसका सारा पानी निकाल दें। अब एक ब्‍लेंडर में कुट्टॅ, अंडा, ब्राउन शुगर दालचीनी, नमक और आधा कप पानी मिलाएं और ब्‍लेंडर को चालू करें। आप ब्‍लेंडर को तब तक चलाएं जब तक आपको चिकना पेस्‍ट और हल्‍का पतला प्राप्‍त न हो। मध्‍यम आंच में एक कढ़ाई को गर्म करें और इसे अंदर से तेल लगाकर चिकना बनाएं। अब कढ़ाई में तैयार किये हुए घोल की 1/3 कप मात्रा डालें और अच्‍छी तरह से कढ़ाई में फैलाएं। आंच को तेज करें और मिश्रण को 2 मिनिट तक पकने दें। इसके बाद आप चीले को दूसरी तरफ पलटाकर भी सेकें। आपका कुट्टू के आटे से बना चीला तैयार हैं।

कुट्टू खाने के नुकसान – 
कुट्टू खाना स्‍वास्‍थ्‍य के लिए अच्‍छा होता है। कुट्टू का सेवन करने के दौरान कोई गंभीर दुष्‍प्रभाव नहीं होते हैं। लेकिन फिर भी आपको सलाह दी जाती है इसका बहुत ही कम मात्रा में सेवन करना चाहिए। क्‍योंकि पोषक तत्‍वों की उच्‍च मात्रा का उपभोग करना आपकी अन्‍य स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं का कारण बन सकता है। कुट्टू खाने के संभावित साइड इफैकट्स इस प्रकार हैं।
  • अधिक मात्रा में कुट्टू का सेवन करने से त्वचा में सूजन और चकते हैं जो एलर्जी के कारण हो सकता है।
  • अधिक समय से रखे हुए कट्टू के आटे का उपभोग नहीं करना चाहिए। क्‍योंकि सामान्‍य रूप से कूटू का आटा 1 महिने में खराब हो सकता है।
  • फाइबर की उच्‍च मात्रा होने के कारण अधिक मात्रा में कुट्टू का सेवन पाचन संबंधी समस्याओं को बढ़ा सकता है। जिससे कब्‍ज और अपच जैसी समस्‍याएं हो सकती हैं।
  • यदि आप किसी विशेष प्रकार की दवाओं का सेवन कर रहे हैं। ऐसी स्थिति औषधीय प्रयोजन हेतू कुट्टू का सेवन करने से पहले अपने चिकित्‍सक से सलाह लेना आवश्‍यक है।


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