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9 दिस॰ 2019

कलौंजी (मंगरैल) के बीजों के फायदे और नुकसान

Advantages and disadvantages of kalonji (Mangrail) seeds
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कलौंजी के बीजों से कैसे कम करें वजन रसोई में पायी जाने वाली कलौंजी का प्रयोग सिर्फ खानें में ही नहीं किया होता है, बल्कि इसमें मौजूद बीजों से आसानी से वजन नियंत्रण किया जा सकता है। कलौंजी आयुर्वेदिक औषधि भी होती है, जो हमारे शरीर को कई बीमारियों से बचाती है और शरीर की अतिरिक्त चर्बी को घटाने में हमारी मदद करती है। यह मधुमेह में  लाभदायक है, क्‍योंकि इससे कोलेस्‍ट्रॉल में कमी आती है। इसमें विटामिन, सुगंधित तेल और एन्जाइम्स जैसे गुण  होते हैं। कलौंजी बहुत सारे यौगिकों से मिलकर बनी होती है इसमें निगोलोन, एमिनो एसिड्स, सैपोनीन, क्रूड फाइबर, प्रोटीन, फैटी एसिड, कैल्शियम, आयरन, सोडियम, पोटैशियम होता है। इस लेख में आओ जानेगें की  कलौंजी के बीजों से किस तरह वजन कम किया जा सकता है।

कलौंजी के बीज वजन कम करने में कैसे करतें है मदद
अध्ययन के अनुसार ब्लैक हेर्ब्स पेट की चर्बी को कम करने में मदद करती है। अध्ययन के अनुसार जिन लोगों को वज़न घटाने के लिए इसे सेवन करने के लिए दिया गया था उन्होंने एक हफ़्ते में वज़न कम किया था। इससे ब्‍लड प्रेशर भी कम होता है। और इसका कोई साइड इफेक्‍ट नहीं होता है। उनका मानना है कि इसमें फाइबर की मात्रा ज़्यादा होने के कारण यह वज़न घटाने में मदद करता है।

कलौंजी के बीजों का सेवन करने का तरीका 
इसका उपयोग करने के लिए कलौंजी के चार से पांच दानों को लेकर उनको पहले पीस लें। फिर उस चूर्ण को एक गिलास गर्म पानी में डालकर अच्छी तरह से घोल लें। फिर उसमें एक चम्मच शहद और थोडा सा नींबू का रस डालकर पी लें। नींबू वज़न घटाने के साथ ही हमारे शरीर के विषाक्त पदार्थ को निकालने में मदद करता है।

पेट के कीड़े का करे सफाया
पेट में कीड़े हो गए हैं, तो कलौंजी का सेवन तीन-चार दिनों तक लगातार करें। आधी छोटी चम्‍मच कलौंजी के तेल को एक चम्‍मच सिरके के साथ मिलाकर दिन में तीन बार पिएं। पांच से दस दिन इसे पीने से पेट के कीड़े मर जाते हैं।

डायबिटीज रखे कंट्रोल
1 कप काली चाय बनाकर, उसमें आधा चम्‍मच कलौंजी का तेल मिलाएं। सुबह और रात में सोने से पहले इसे पिएं। डायबिटीज से बचाव होगा और जिन्हें यह बीमारी है, वो इस पर काबू पा सकेंगे।

मुंहासे करे कम
2 चम्‍मच नींबू के रस में आधा चम्‍मच कलौंजी का तेल मिलाएं। सुबह और रात में चेहरे पर लगाएं। इससे त्‍वचा में निखार आती है। काले धब्‍बे कम होते हैं और मुंहासे कम होते हैं। नींबू की जगह एप्‍पल साइडर वेनेगर भी इस्तेमाल कर सकती हैं।

खांसी और दमा
खांसी और दमा की शिकायत होने पर छाती और पीठ पर मंगरैला के तेल की मालिश करें। तीन चम्मच मंगरैला का तेल रोज पिएं और पानी में तेल डालकर उसका भाप लें।

हार्ट डिजीज की समस्या
जब भी कोई गर्म पेय लें, तो उसमें एक चम्मच मंगरैला का तेल मिला लें। तीन दिन में एक बार पूरे शरीर पर तेल की मालिश करके आधा घंटा धूप का सेवन करें। लगातार एक महीने तक ऐसा करने से आराम मिलता है।

कलोंजी के फायदे आंखो के लिए 
गाजर के रस मे कलोंजी का तेल मिला के पीने से आंखो मे अगर चश्मा लग गया हो तो धीरे धीरे नंबर कम हो जाएगा।
अगर रोज आधी चम्मच कलोंजी चबा कर खाया जाए तो बढ़ती उम्र की थकान और कम्प्युटर के सामने बैठने से जो भी आंखो की परेशानिया होती है उसमे आराम मिलेगा। यह हमारे ब्लड को भी शुद्ध करता है।

कलोंजी के फायदे सिर दर्द के लिए 
दिन भर कम करने से बहुत तनाव हो जाता है जिससे सर मे दर्द होने लग जाता है,उस समय सर दर्द की गोली न खाकर थोड़ा सा ब्लेक सीड्स चबा ले दर्द मे बहुत राहत मिलती है। अगर सर्दी जुखाम हो गया हो तो कलोंजी के तेल मे कुछ बूंदे सरसों के तेल की मिलाकर कान के पीछे और सिर मे लगाने से सिर दर्द मे राहत मिलती है। ग्रीन टी मे कुछ बूंदे कलोंजी का रस मिलाकर पीने से सिर दर्द मे राहत मिलती है।

कलोंजी के फायदे मधुमेह मे 
ब्लेक सीड्स मे लिनोलेक एसिड,मेलेन्थीन,निगीलिने,अनेतोले,थमोक्विनोने,होता है जो ब्लड शुगर को नियंत्रित रखता है। यह टाइप २ डायबिटीज मे बहुत ही फायदेमंद है,क्योकि यह खून मे शुगर की मात्र को नियंत्रित रखता है और पैंक्रियाज़ को सक्रिय करने की कोशिश करता है,मधुमेह के रोगी को रक्तचाप की बीमारी भी होने का डर रहता है,इसलिए सब्जी,सूप या सलाद मे कलोंजी का पाउडर या तेल का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए।

कलोंजी पेट के लिए -
कलोंजी का चूर्ण बना कर लेने से पेट दर्द,बदहजमी,और भी पेट संबंधी समस्या मे राहत मिलती है। चूर्ण बनाने के लिए सौंफ,काले तिल,अजवाइन,हिंग और जीरा मिलाकर सेंक ले इसके बाद इसे पीस कर चूर्ण बना कर रोज़ खाना खाने के बाद एक चम्मच खाने से पेट की परेशानियाँ कम हो जाती है। अगर पेट के उपर सूजन हो गयी हो तो कलोंजी के तेल की मालिश करने से कम हो जाएगी।

कलौंजी के दुष्प्रभाव
  • सम्पर्क से होने वाला चर्मरोग: कलौंजी का एक संभावित दुष्प्रभाव सम्पर्क से होने वाला चर्मरोग है। कलौंजी को बस छूकर भी त्वचा पर लाल धब्बे हो सकते हैं, जो अक्सर खुजली वाली सनसनी भी करते है।
  • अल्प रक्त-चाप: कलौंजी ब्लड प्रेशर को इतना कम कर सकता है कि यह हाइपोटेंशन का कारण बनता है, खासकर यदि आप वर्तमान में मूत्रवर्धक या एंटीहाइपरेटिव दवा ले रहे हैं.
  • इसलिए कोई भी चिकित्सा स्थिति का इलाज करने के लिए कलौंजी लेने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए।
  • कलोंजी को लगातार नहीं खाना चाहिए यानि की कुछ दिन खाने के दो तीन महीने के बाद ही इसे खाना चाहिए,क्योकि इसके सेवन से खून पतला हो जाता है जिससे गर्भवती महिलाओं को या फिर किसी का तुरंत ऑपरेशन हुआ हो तो रक्त्स्त्राव की समस्या हो सकती है।
  • अगर किसी व्यक्ति का रक्तचाप कम रहता हो तो उन्हे भी कलोंजी नहीं खाना चाहिए।
  • ऐसे देखा जय तो कलोंजी के साइड इफैक्ट से ज्यादा बेनेफिट्स ही है बस इसकी मात्र को ध्यान मे रखते हुए ही इसका सेवन करे।


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